शपथ से पहले होटल मौर्या में ‘क्लोज़-डोर मीटिंग’, नीतीश–शाह मुलाकात से बढ़ी हलचल

Nitish Government Oath: बिहार की राजनीति आज एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी, जब जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथग्रहण समारोह पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित किया गया, जहां कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, बीजेपी, जेडीयू, हम, लोजपा (आर) और रालोमो के प्रमुख नेता मौजूद रहे।

समारोह से कुछ घंटे पहले हुई नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया। नीतीश कुमार जब सीएम आवास एक अणे मार्ग से निकले, तो माना जा रहा था कि वे सीधे गांधी मैदान जाएंगे। लेकिन अचानक उनका काफिला होटल मौर्या की ओर मुड़ गया, जहां अमित शाह पहले से मौजूद थे। दोनों नेताओं के बीच लगभग आधे घंटे तक बंद कमरे में बातचीत चली, जिसके बाद नीतीश कुमार सीधे शपथग्रहण स्थल पहुंचे।

मुलाकात पर गरमाई सियासत
शपथ से ठीक पहले हुई इस मुलाकात ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। माना जा रहा है कि इस बैठक में नए मंत्रिमंडल की रूपरेखा और मंत्री पदों के अंतिम बंटवारे पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार, जेडीयू–बीजेपी गठबंधन में इस बार मंत्रालयों का फॉर्मेट पहले ही तैयार था, और मुलाकात सिर्फ औपचारिक सहमति की प्रक्रिया थी।

नीतीश कुमार और अमित शाह के संबंध हाल के वर्षों में काफी सहज माने जाते हैं। दोनों नेता सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे की तारीफ करते रहे हैं और जेडीयू–बीजेपी को लंबे समय से “नेचुरल अलाइंस” माना जाता रहा है।

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संभावित मंत्रिमंडल का स्वरूप
सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन सरकार में मंत्रियों के पदों का वितरण इस प्रकार हो सकता है:

  • बीजेपी – 17 मंत्री
  • जेडीयू – 9 मंत्री (नीतीश कुमार सहित)
  • लोजपा (आर) – 2 मंत्री
  • रालोमो – 1 मंत्री

* उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश के शपथ लेने की संभावना

  • हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा – 1 मंत्री

* जीतनराम मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं

माना जा रहा है कि सूची लगभग अंतिम रूप ले चुकी है और शपथग्रहण के साथ ही इसे सार्वजनिक किया जाएगा।

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ऐतिहासिक उपलब्धि
नीतीश कुमार का दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेना बिहार की राजनीति में उनकी गहरी पकड़ और राजनीतिक संतुलन साधने की क्षमता का प्रमाण है। बिहार की सत्ता में यह एक ऐसा क्षण है जिसने राज्य की समकालीन राजनीति को फिर एक नई दिशा दी है।

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