यौन उत्पीड़न, व्हाट्स ऐप पर गंदी बातें… 300 पन्नों में चैतन्यानंद का पापलोक

Chaitanyanand Saraswati: स्वामी चैतन्यानंद पर आरोप हैं कि वह छात्राओं को देर रात अश्लील मैसेज करता था. ट्रिप पर या कार के अंदर उनसे छेड़छाड़ करता था और उनका रिजल्ट खराब करने की धमकी भी देता था.

Chaitanyanand Saraswati: दिल्ली के वसंत कुंज में बने एक आश्रम का संचालक रहे स्वामी चैतन्यानंद पर बेहद गंभीर आरोप लगे हैं. दिल्ली के ही श्री शारदा इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की कई छात्राओं ने चैतन्यानंद पर यौन उत्पीड़न, देर रात छेड़छाड़, अश्लील मैसेज और बातों का आरोप लगाया है. इतना ही नहीं, चैतन्यानंद पर यह आरोप भी है कि उसने छात्राओं की मार्कशीट से छेड़छाड़ कर उनपर अपनी बातें मनवाने का दबाव बनाया.

शारीरिक संबंध बनाने का दबाव

आरोपी चैतन्यानंद के निशाने पर वह छात्राएं थीं, जिन्हें ईडब्ल्यूएस छात्रवृत्ति मिली है। वह इन पर अलग-अलग तरह से दबाव बनाकर शारीरिक संबंध बनाने के लिए बुलाता था। उसे ऐसा लगता था कि आर्थिक तौर पर कमजोर होने की वजह से छात्राओं को वह आसानी से अपने जाल में फंसा लेगा।

अश्लील मैसेज भेजता था

आरोपी अक्सर छात्राओं को व्हाट्सऐप एसएमएस के जरिए अश्लील मैसेज भेजता था। फिर कुछ वार्डन अगले दिन छात्राओं के मोबाइल की जांच कर उस मैसेज को डिलीट कराते थे। इसके अलावा मोबाइल की जांच कर यह भी देखते थे कि कहीं स्क्रीन शॉट तो लिया नहीं गया है। छात्राओं ने कुछ शिक्षक से शिकायत की तो उन्हें डांट दिया गया।

50 से ज्यादा मोबाइल फोन की हुई जांच

बाबा चैतन्यानंद पर लगे आरोपों के बीच पुलिस ने 50 से ज्यादा छात्राओं के मोबाइल फोन की जांच की है. हैरान करने वाली बात ये है कि इन सभी मोबाइल फोन में चैट पहले से ही डिलीट मिले हैं. ऐसे में पुलिस इस बात की जांच में जुटी है कि क्या बाबा ने जानबूझकर इन लड़कियों के फोन से इन चैट्स को हटवाया है. पुलिस फिलहाल उन चैट्स को रिकवर करने की भी कोशिश कर रही है.

ये भी पढ़े-

Delhi: अश्लील मैसेज और गंदी भाषा… दिल्ली के इंस्टिट्यूट में छात्राओं का यौन शोषण

स्वामी चैतन्यानंद के खिलाफ 300 पन्नों का सबूत

चैतन्यानंद के खिलाफ दर्ज FIR में छात्राओं ने आरोप लगाया है कि वह उनके करियर को लेकर दबाव बनाता था और उन्हें अपने मन के सारे काम करने को मजबूर करता था. FIR में स्पष्ट तौर पर लिखा है कि चैतन्यानंद जिन लड़कियों को परेशान करता था, उनमें से ज्यादातर पीड़ित लड़कियां गरीब परिवारों (EWS कैटेगरी) से आती हैं.

 

Back to top button