
दिल्ली दंगे में शामिल उमर और शरजील पर बड़ा फैसला, सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई टली
Delhi Riots 2020: उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई टाल दी। इस मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर और गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिकाओं पर फैसला होना था। अब इस पर अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी।
दंगों में 53 की मौत, सैकड़ों घायल
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में भयानक सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इस दंगे में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह हिंसा एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी, जिसमें उपरोक्त आरोपियों की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
सुनवाई क्यों टली?
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन वी अंजारी की पीठ कर रही है। सुनवाई पहले 12 सितंबर को होनी थी, लेकिन जस्टिस कुमार को केस की फाइलें देर से मिलने के कारण इसे टाल दिया गया था। शुक्रवार को एक बार फिर किसी वजह से सुनवाई आगे बढ़ा दी गई और अब इसे 22 सितंबर को लिया जाएगा।
कौन पेश करेंगे दलीलें?
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी और सीयू सिंह अदालत में अपनी दलीलें रखेंगे। सभी आरोपी वर्तमान में जेल में बंद हैं और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से राहत की गुहार लगाई है।
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UAPA के तहत आरोप
दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गंभीर आरोप लगाए हैं। यह कानून बेहद सख्त माना जाता है और इसके तहत जमानत मिलना बेहद मुश्किल होता है।
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इनकी जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि पहली नजर में आरोपियों की भूमिका गंभीर दिखती है और उनके भड़काऊ भाषणों से बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए, जिससे हिंसा भड़की।
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क्या-क्या है आरोप?
- शरजील इमाम को जनवरी 2020 में भड़काऊ भाषणों और हिंसा की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
- उमर खालिद पर भी इसी साजिश का हिस्सा होने का आरोप है।
- दोनों पर CAA और NRC विरोध प्रदर्शनों को हिंसक दिशा देने का आरोप लगाया गया।
अब देखना यह होगा कि 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट इस मामले में क्या रुख अपनाता है। क्या आरोपियों को जमानत मिलेगी या उन्हें जेल में ही रहना होगा? यह फैसला न केवल आरोपियों के लिए बल्कि दिल्ली दंगों से जुड़े पूरे मामले के लिए अहम साबित होगा।
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