‘जंगल की आड़ में लूट’—पेंच नेशनल पार्क मुद्दे पर दिग्विजय सिंह का भाजपा पर हमला

Digvijaya Singh Statement: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने पेंच नेशनल पार्क से जुड़े एक विवाद को लेकर राज्य सरकार और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पेंच नेशनल पार्क के कोर एरिया में स्थानीय आदिवासियों को अपने ही क्षेत्र में रिसोर्ट या आजीविका से जुड़े निर्माण की अनुमति नहीं दी जा रही है, जबकि दूसरे जिलों के आदिवासियों के नाम पर भाजपा के एक विधायक जमीन खरीदकर वहां रिसोर्ट बनवा रहे हैं।

“स्थानीय आदिवासियों के साथ हो रहा अन्याय”
दिग्विजय सिंह ने कहा कि पेंच क्षेत्र में पीढ़ियों से रह रहे आदिवासियों को जंगल और जमीन से बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वन कानूनों और नियमों का इस्तेमाल गरीब आदिवासियों के खिलाफ किया जा रहा है, जबकि प्रभावशाली लोगों को नियमों में ढील दी जा रही है।
उनका कहना है कि स्थानीय आदिवासियों को यह कहकर रोका जा रहा है कि कोर एरिया में निर्माण की अनुमति नहीं है, लेकिन उसी इलाके में रसूखदार लोग रिसोर्ट बना रहे हैं।

भाजपा विधायक पर सीधा आरोप
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि भाजपा के एक विधायक ने दूसरे जिले के आदिवासियों के नाम पर जमीन खरीदी है और उसी जमीन पर व्यावसायिक रिसोर्ट तैयार किए जा रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने इसे “जंगल की आड़ में कॉरपोरेट और राजनीतिक लूट” करार दिया और कहा कि यह आदिवासियों के अधिकारों का खुला उल्लंघन है।

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‘मैं खुद उतरूंगा मैदान में’- दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि वह इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे।
उन्होंने कहा,
“यह सिर्फ जमीन या रिसोर्ट का मामला नहीं है, यह आदिवासियों के अस्तित्व और उनके हक की लड़ाई है। मैं खुद इस लड़ाई में उतरूंगा और आदिवासियों को उनका अधिकार दिलाकर रहूंगा।”

उन्होंने संकेत दिए कि जरूरत पड़ी तो वे आंदोलन, कानूनी लड़ाई और सड़क से सदन तक इस मुद्दे को उठाएंगे।

वन कानूनों के दुरुपयोग का आरोप
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि वन अधिकार कानून (Forest Rights Act) का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा है। जिन आदिवासियों को जंगल में रहने और आजीविका का संवैधानिक अधिकार मिला है, उन्हें डराया जा रहा है, जबकि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों को खुली छूट दी जा रही है।

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भाजपा की ओर से जवाब का इंतजार
फिलहाल भाजपा या संबंधित विधायक की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।

बढ़ सकता है राजनीतिक तापमान
पेंच नेशनल पार्क से जुड़ा यह मामला अब सिर्फ पर्यावरण या पर्यटन का नहीं रहा, बल्कि आदिवासी अधिकार, जंगल संरक्षण और सत्ता के दुरुपयोग जैसे बड़े सवालों से जुड़ गया है। दिग्विजय सिंह के इस आक्रामक रुख के बाद राज्य में राजनीतिक तापमान बढ़ना तय माना जा रहा है।

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