जीवन का सही अर्थ बताते हैं सनातन धर्म के धर्मग्रंथ: डॉ. समीर त्रिपाठी

डॉ. समीर त्रिपाठी

श्री शिवमहापुराण के गायन के 100 एपिसोड पूरे होने पर समीर त्रिपाठी ने दी बधाई   

लखनऊ। विगत 25 जुलाई को श्रावणमास के पावन पर्व पर यूट्यूब चैनल मेधज एस्ट्रो पर वर्चुअली रिलीज किए  गए श्री शिवमहापुराण (अर्थ सहित) के गायन के वीडियो ने अपने 100 एपिसोड की यात्रा पूरी कर ली। श्री शिवमहापुराण के इस गायन को मेधज टेक्नोकांसेप्ट प्रा.लि. के सीएमडी डॉ. समीर त्रिपाठी ने स्वर प्रदान किया है।

इस अवसर पर सभी सम्बंधित लोगों को बधाई देते हुए डॉ. समीर त्रिपाठी ने कहा देवाधिदेव महादेव की असीम अनुकम्पा से मुझे यह सौभाग्य प्राप्त हुआ कि मैं भगवान शिव की महिमा को आम जनमानस तक पहुंचाने का निमित्त बन सकूं।

samir tripathi

डॉ. समीर त्रिपाठी ने कहा मैं चाहता हूँ कि आज की युवा पीढ़ी सनातन धर्म की गौरवशाली व समृद्ध वैदिक परम्पराओं एवं मूल्यों के बारे में जाने। श्री शिवमहापुराण सिर्फ एक महाग्रंथ ही नहीं है बल्कि यह एक जीवनशैली है।    

डॉ. समीर त्रिपाठी ने कहा हमारे धर्मशास्त्र जीवन का सही अर्थ समझाते हैं। एक सुखी व समृद्ध जीवन मानवजाति की परिकल्पना होती है जिसे मूर्तरूप सिर्फ सनातन धर्म के धर्मशास्त्र ही प्रदान करते हैं।

डॉ. त्रिपाठी ने यह भी कहा कि श्री शिवमहापुराण को स्वर प्रदान कर मुझे बहुत ही आत्मिक संतुष्टि प्राप्त हुई है जिसका शब्दों में बयान संभव नहीं है। ये धर्मग्रन्थ आत्मा को सुकून पहुँचाने वाला ग्रन्थ है।

बता दें कि श्री शिवमहापुराण में 466 अध्याय हैं। प्रतिदिन एक अध्याय के गायन का वीडियो यूट्यूब चैनल मेधज एस्ट्रो पर रिलीज हो रहा है।

याद दिला दें कि इससे पूर्व डॉ. समीर त्रिपाठी ने ॐ नम: शिवाय, सम्पूर्ण रामचरितमानस (अर्थ सहित) व कई अन्य भक्तिपूर्ण रचनाओं का गायन किया है जो उनके यूट्यूब चैनल मेधज एस्ट्रो पर उपलब्ध है।

डॉ. समीर त्रिपाठी की आध्यात्मिक यात्रा

डॉ. समीर त्रिपाठी ने कोरोना काल में सम्पूर्ण रामचरितमानस (अर्थ सहित) का गायन रिकॉर्ड समय में करके आपदा को अवसर में बदलने का काम किया, जिससे हजारों-लाखों लोग प्रेरित हुए।

सम्पूर्ण रामचरितमानस (अर्थ सहित) के गायन का वीडियो रामनवमी के पावन पर्व पर यूट्यूब चैनल मेधज एस्ट्रो पर रिलीज हुआ था। इस कार्यक्रम को आद्यात्मिक गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज सहित तमाम संत-महात्माओं, राजनेताओं एवं समाजसेवियों का आशीर्वाद प्राप्त हुआ था।

डॉ. समीर त्रिपाठी ने अपने पिता शिवदत्त त्रिपाठी की गीता वाणी पुस्तक की चार लाइनों

जो विचार भजो वही मैं हो जाता हूं

उस विचार का दर्पण हटते ही खो जाता हूं

मेरा ही प्रतिबिंब चेतना पकड़ रही है

मैं ही बन आकार चेतना में आता हूं

को जीवन में उतारते हुए अपनी आध्यात्मिक यात्रा प्रारंभ की। डॉ. समीर त्रिपाठी के इस अद्भुत कार्य को मार्वलस बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स, हाई रेंज बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स व इंडिया बुक ऑफ़ रेकॉर्ड्स ने भी मान्यता प्रदान की है।

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