सोशल मीडिया प्रचार पर चुनाव आयोग हुई सख्त… प्रसारित करने से पहले करना होगा ये काम

Election Commission of India (ECI): चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव और जम्मू और कश्मीर समेत छह राज्यों की आठ विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। साथ ही आयोग ने राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिससे चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

यह दिशा-निर्देश विशेष रूप से सोशल मीडिया पर होने वाले राजनीतिक प्रचार पर सख्ती के संकेत देते हैं।

राजनीतिक विज्ञापनों के लिए अनिवार्य होगा पूर्व-सत्यापन
चुनाव आयोग के 9 अक्टूबर 2025 को जारी आदेश के अनुसार, अब किसी भी राजनीतिक विज्ञापन को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से पहले Media Certification and Monitoring Committee (MCMC) से pre-certification कराना अनिवार्य होगा।

इसमें Facebook, YouTube, Instagram, X (पूर्व में ट्विटर) और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

‘पेड न्यूज’ और फेक कंटेंट पर सख्त नजर
MCMC अब पेड न्यूज, फेक न्यूज और भ्रामक प्रचार सामग्री पर कड़ी निगरानी रखेगी। किसी भी संदिग्ध सामग्री की तुरंत जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा, चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशियों को नामांकन पत्र के साथ अपने सत्यापित सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी देना अनिवार्य होगा।

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सोशल मीडिया पर प्रचार खर्च की देनी होगी पूरी जानकारी
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया प्रचार से जुड़ा हर खर्च Representation of the People Act, 1951 की धारा 77(1) और Supreme Court of India के दिशा-निर्देशों के तहत चुनाव समाप्त होने के 75 दिनों के भीतर आयोग को रिपोर्ट करना होगा।

इसमें शामिल होंगे:

  • सोशल मीडिया कंपनियों को किया गया भुगतान
  • वीडियो, ग्राफिक्स, पोस्ट आदि तैयार करने का खर्च
  • सोशल मीडिया अकाउंट संचालकों को दिया गया पारिश्रमिक
  • डिजिटल विज्ञापन के प्रमोशन की फीस

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डिजिटल पारदर्शिता पर आयोग का फोकस
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों से जिम्मेदार डिजिटल प्रचार करने की अपील की है। आयोग का कहना है कि इस कदम से फेक न्यूज, भ्रामक कंटेंट और अवैध चुनावी खर्च पर प्रभावी रोक लगेगी।

यह पहली बार है जब आयोग ने सोशल मीडिया पर राजनीतिक प्रचार के लिए इतनी सख्त और स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है।

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