Panchayat Season 4 Review: चुनावी बवंडर में फंसा फुलेरा, कई सवालों का जबाब अब भी अधूरे

Panchayat Season 4 Review: TVF की हिट वेब सीरीज पंचायत का नया सीजन OTT पर आ गया है। अभी तक इस सीरीज के तीन पार्ट आ चुके हैं। और ये सीरीज चौथे सीजन के साथ फिर दर्शकों के आगे हाजिर है ।

Panchayat Season 4 Review: ओवर द टॉप यानि OTT पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले वेब सीरीज में एक नाम पंचायत (Panchayat) भी है। इस सीरीज की शुरुआत साल 2020 में हुई थी। उस वक्त किसी को नहीं पता था कि आज यह टॉप ओटीटी सीरीज में शुमार हो जाएगी। पांच सालों में पंचायत सीरीज के तीन सीजन आ चुके हैं। पिछले साल ही तीसरा सीजन आया था जिसे काफी पसंद किया गया था। आज पंचायत का चौथा सीजन (Panchayat Season 4) भी रिलीज हो गया है।

सचिव जी, रिंकी, मंजू देवी और बनराकस की टोली फिर से दर्शकों को लुभा पाई है या नहीं, चलिए आपको पंचायत सीजन 4 के सोशल मीडिया रिएक्शंस के बारे में बताते हैं।

क्या है इस बार की कहानी?

सीजन 4 की शुरुआत वहीं से होती है जहां सीजन 3 का अंत हुआ था। प्रधान जी पर हुए हमले के बाद अब फुलेरा में चुनावी माहौल गरमा गया है। मंजू देवी (नीना गुप्ता) और क्रांति देवी (सुनीता राजवार) के बीच प्रधानी की कुर्सी के लिए कड़ी टक्कर है। एक तरफ लौकी का चुनाव चिह्न लेकर मंजू देवी मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ प्रेशर कुकर के निशान पर क्रांति देवी। सचिव जी (जितेंद्र कुमार) इस बार भी अपने CAT एग्जाम के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं, साथ ही बनराकस पर हाथ उठाने के केस की चिंता भी सता रही है। रिंकी (सांविका) के साथ उनकी लव स्टोरी भी इस सीजन में नई मंजिल की तरफ बढ़ती दिखाई देती है।

कई सवालों का जबाब अब भी अधूरे

मंजू देवी और क्रांति देवी के बीच चल रही चुनावी जंग देखना मजेदार भी है बोरिंग भी. अगर आपको ‘पंचायत’ का सीजन 3 याद हो तो, वो काफी उथला था. यही प्रॉब्लम इस सीजन में भी लगती है. चुनाव, उसकी गर्मी और खींच-तान के इर्द-गिर्द नए सीजन की कहानी गढ़ी गई है. हालांकि उससे आगे आपको कुछ नहीं मिलता. प्रधानजी पर गोली किसने चलवाई इस बात का जवाब ढूंढा जा रहा है. जवाब मिलने पर भी बात पूरी नहीं होती.

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जितेंद्र कुमार, नीना गुप्ता, रघुबीर यादव, दुर्गेश कुमार, सुनीता राजवार, प्रकाश झा, सांविका, चंदन रॉय, फैसल मलिक सभी अपने किरदारों में रमे हुए हैं. उन्हें देखकर आपको वहीं मजा और सुकून मिलता है। बिनोद का किरदार निभाने वाले अशोक पाठक का काम पूरी सीरीज में सबसे अच्छा है। बाकी सीरीज का रस पहले जैसा ही है, साफ-सुथरी कॉमेडी और पॉलिटिक्स। हालांकि इस बार ये फनी कम और पॉलिटिकल ज्यादा है।

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