Subedaar Review: अनिल कपूर के एक्शन से चौके फैंस, कमजोर स्क्रिप्ट ने फेरा पानी

Subedaar Review: अनिल कपूर ‘सूबेदार‘ में उस हार्डकोर एक्शन हीरो अवतार में लौटे हैं जो वो 80s मे निभाया करते थे. रिटायर्ड फौजी के रोल में उनका भौकाल तो ट्रेलर में ही माहौल जमा रहा था

Subedaar Review: अनिल कपूर की नई फिल्म ‘सूबेदार’ अमेजन प्राइम पर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर छा गई है. दर्शक अनिल कपूर के दमदार एक्शन और उनकी जबरदस्त एनर्जी की खूब तारीफ कर रहे हैं. सुरेश त्रिवेणी के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक पूर्व सैन्य अधिकारी अर्जुन मौर्य की कहानी है, जो समाज में फैले भ्रष्टाचार और खतरों से लड़ते हुए अपनी निजी समस्याओं को सुलझाने की कोशिश करता है. हाई-ऑक्टेन एक्शन और इमोशन्स से भरपूर इस फिल्म ने फैंस पर असर डाला है, लेकिन इसके क्लाइमैक्स ने लोगों को थोड़ा निराश किया

क्या है कहानी?

ये कहानी है एक रिटायर्ड फौजी अर्जुन मौर्या की, वो एक माफिया के पास काम मागंने जाता है. पत्नी की मौत हो चुकी हैं. जवान बेटी से ज्यादा बनती नहीं है लेकिन फिर उस माफिया और इस सूबेदार के बीच कुछ ऐसा होता है कि आपको एक जबरदस्त टकराव देखने को मिलता है. इस टकराव को आप प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं.

कैसी है फिल्म

ये एक ठीक ठाक फिल्म है, फिल्म की कहानी कुछ खास नहीं है. फिल्म की कहानी का अंदाजा आपको ट्रेलर से ही लग जाता है, लेकिन इस फिल्म को देखने की सबसे बड़ी वजह से इसके कमाल के एक्टर. अनिल कपूर ने कमाल का काम किया है. उनका एक्शन, उनका इमोशन, उनका गुस्सा, आपको हैरान करता है. आपको ये बताता है कि मौका मिले तो एक 69 साल का हीरो गर्दा काट सकता है.

अनिल कपूर ने जिस शिद्दत से ये किरदार निभाया है वो काबिले तारीफ है. इस फिल्म में हीरो की हीरोगीरी जिस विलेन की वजह से चमकी वो हैं आदित्य रावल, क्योंकि हीरो की हीरोगीरी तभी चमकेगी जब विलेन मजबूत होगा. आदित्य रावल ने अपना अब तक का बेस्ट दिया है. वो बहुत खतरनाक और खौफनाक विलेन बने हैं.

पंचायत के प्रह्लाद चा यानि फैजल मलिक ने भी कमाल का काम किया है. सॉफ्टी नाम का उनका किरदार उनके बाकी सारे किरदारों से अलग है. वो एक ऐसे माफिया हैं जो शांत रहते हैं लेकिन जब आखिर में चिल्लाते हैं तो कहर बरसता है.

सौरभ शुक्ला ने एक बार फिर बढ़िया काम किया है. मोना सिंह का किरदार दमदार है. राधिका मदान के किरदार से लड़कियां सीख सकती हैं. कॉलेज में लड़के परेशान करते हैं तो वो उनका जिस तरह से सामना करती हैं, वो कमाल लगता है और राधिका ने ये किरदार मजबूती से निभाया है.

राइटिंग और डायरेक्शन

सुरेश त्रिवेणी और प्रज्जवल चंद्रशेखर की राइटिंग कमजोर है. उन्हें फिल्म में कुछ और मसाला डालना चाहिए था, कुछ सवालों को जवाब अधूरे रह जाते हैं. ये जवाब मिलने भी जरूरी थे. डायरेक्शन ठीक है. मध्य प्रदेश का फील अच्छे से क्रिएट किया गया है. फिल्म को रॉ रखा गया है. वीएफएक्स का इस्तेमाल नहीं किया गया, रियल लोकेशनस पर शूट किया गया है.

ये भी पढ़े- धुरंधर 2 की रिलीज से पहले भड़क गईं Yami Gautam? कृति सैनन से जुड़ा नाम…

Back to top button