
Jolly LLB 3 Review: अक्षय-अरशद ने किया कमाल, क्लाइमेक्स है मूवी की जान
Jolly LLB 3 Review: अक्षय कुमार और अरशद वारसी स्टारर फिल्म ‘जॉली एलएलबी 3’ आखिरकार बड़े पर्दे पर रिलीज हो गई है और इसे देखने के बाद दर्शकों की ओर से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
Jolly LLB 3 Review: अक्षय कुमार और अरशद वारसी की लीगल ड्रामा थिएटर में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म की टक्कर निशांची और अजेय के साथ हुई है। तीसरी फ्रेंचाइजी के साथ लौटे सुभाष कपूर की फिल्म (Jolly LLB 3 movie Review) पर समीक्षकों ने तो फैसला सुना दिया। इस बार, फ्रेंचाइजी के दोनों लोकप्रिय वकील, अरशद वारसी (जॉली 1) और अक्षय कुमार (जॉली 2), आमने-सामने आ रहे हैं। फिल्म में एक बार फिर सौरभ शुक्ला जज सुंदर लाल त्रिपाठी की भूमिका में हैं। वहीं, हुमा कुरैशी और अमृता राव भी पुष्पा पांडे और संध्या के अपने किरदारों में वापसी कर रही हैं।
फिल्म की अब तक की कमाई पर नजर
‘जॉली एलएलबी 3’ ने 10 बजे तक बॉक्स ऑफिस पर 1.63 करोड़ की कमाई की है। फिल्म की शुरुआत धीमी है, लेकिन अगले शोज के साथ ही फिल्म की कमाई बढ़ने की उम्मीद है और माना जा रहा है कि वर्ड ऑफ माउथ इस फिल्म के लिए काम करेगा, जैसा पहली दो किश्तों में भी कर चुका है। ऐसे में उम्मीद है कि वीकेंड पर फिल्म की कमाई में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
क्या है जॉली एलएलबी 3 की कहानी?
‘जॉली एलएलबी 3’ की कहानी हमें सीधे 2011 के राजस्थान के बीकानेर जिले के छोटे से गांव परसौल में ले जाती है, जहां एक बड़ा रसूखदार बिजनेसमैन हरिभाई खेतान (गजराज राव) अपने सपनों का प्रोजेक्ट ‘बीकानेर टू बोस्टन’ शुरू करना चाहता है। लेकिन, कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब इस प्रोजेक्ट के लिए उसे गांव के किसानों की जमीनें चाहिए।
हरिभाई खेतान अपनी पहुंच का इस्तेमाल करते हुए स्थानीय नेताओं और अफसरों की मदद से किसानों को गुमराह करता है और उनकी जमीनें अवैध तरीके से अपने नाम करा लेता है। ऐसे में एक किसान आत्महत्या करता है और कहानी में एंट्री होती है किसान की विधवा जानकी की, जो न्याय के लिए उस बड़े बिजनेसमैन से लड़ने का फैसला लेती है। अब जानकी की लड़ाई कौनसा जॉली लड़ता है और कौनसा उसके खिलाफ हो जाता है, ये जानने के लिए आपको थिएटर में जाकर ‘जॉली एलएलबी 3’ देखें.
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सौरभ शुक्ला की टाइमिंग लाजवाब
फिल्म का खास आकर्षण हैं सौरभ शुक्ला। अपनी लाजवाब टाइमिंग और साधारण से साधारण संवाद को भी हंसी के ठहाकों में बदल देने की कला के साथ, वो हर फ्रेम में छा जाते हैं। जॉली एलएलबी 3 किसानों यानी अन्नदातों को अहमियत और जिम्मेदारी को रेखांकित करती है। अंतिम जिरह में जगदीश त्यागी जोरदार शब्दों में कहता है जब हरिभाई की मर्जी की वैल्यू है, विक्रम की है …फिर जानकी राजाराम की मर्जी की वैल्यू क्यों नहीं है। इन वाक्यों में ही जॉली एलएलबी 3 का मर्म है।
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जानें कैसी है फिल्म
ये सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि हमारे देश की वो कहानी है जिसे हम अक्सर शहरी चकाचौंध में भूल जाते हैं. हो सकता है हम AC वाले घरों और दफ्तरों में बैठकर विकास की बातें करें, लेकिन गांव में आज इंडस्ट्रियलिस्ट्स डेवलपमेंट के नाम पर कौड़ियों के दाम पर किसानों की जमीनें खरीद रहे हैं. इनके पाले हुए रसूखदारों के जाल में फंसकर कई गांव उजड़ रहे हैं.
अक्षय कुमार और अरशद वारसी की ‘जॉली एलएलबी 3’ हमें उसी कड़वी सच्चाई का आईना दिखाती है, लेकिन बोर किए बिना. ये उन चुनिंदा फिल्मों में से है जो मनोरंजन के साथ-साथ एक स्ट्रांग संदेश भी देती है.
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