
रात में पैरों में जलन महसूस हो रही है? जानिए क्या कहता है आयुर्वेद
Health: अक्सर रात में कई लोगों को पैरों के तलवों में जलन महसूस होती है। बहुत से लोग इसे थकान या गर्म मौसम का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर में पित्त दोष बढ़ने का संकेत हो सकता है। जब शरीर में पित्त का स्तर बढ़ जाता है, तो वह नीचे की ओर जाकर पैरों में जलन, गर्मी और असहजता पैदा करता है।
आधुनिक चिकित्सा की दृष्टि से कारण
आधुनिक विज्ञान के अनुसार पैरों में जलन कई कारणों से हो सकती है —
- डायबिटीज (मधुमेह): लंबे समय तक शुगर लेवल अनियंत्रित रहने से नसों में सूजन और कमजोरी आ जाती है।
- विटामिन बी12 या आयरन की कमी: नसों को पोषण न मिलने से जलन और सुन्नता महसूस होती है।
- लंबे समय तक खड़े रहना: पैरों में रक्त संचार बाधित होने लगता है।
- गलत जूते पहनना: रबर या सिंथेटिक जूते हवा नहीं लगने देते, जिससे तलवों में गर्मी बढ़ती है।
- मानसिक तनाव या चिंता: तनाव से हार्मोनल असंतुलन होता है, जो शरीर की गर्मी को प्रभावित करता है।
आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद में इसे पित्तज विकार माना गया है। इसमें शरीर की आंतरिक गर्मी बढ़कर नीचे के हिस्सों में जमा होती है। पित्त दोष के साथ वात दोष भी इसमें सहायक भूमिका निभाता है।
इसके लक्षणों में शामिल हैं –
- तलवों में चुभन और जलन
- रात में गर्मी का बढ़ना
- पैरों का भारी लगना या सुन्न पड़ना
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घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार
- ठंडे पानी या गुलाब जल में पैर डुबोना: सोने से पहले 10 मिनट तक पैरों को ठंडे पानी या गुलाब जल में रखें।
- एलोवेरा या नारियल तेल की मालिश: पैर पोंछने के बाद एलोवेरा जेल या नारियल तेल से हल्की मालिश करें।
- नीम या खस के पानी से पैर धोना: यह शरीर को ठंडक और ताजगी देता है।
- त्रिफला जल: सप्ताह में दो बार त्रिफला पानी से पैर धोने से पित्त और गर्मी दोनों संतुलित होते हैं।
- शीतल पेय और आहार: पुदीना, तुलसी, लौकी, बेल, तरबूज जैसे ठंडक देने वाले पेय और फल आहार में शामिल करें।
- आंतरिक औषधियां: वैद्य की सलाह से शतावरी चूर्ण, गिलोय रस, सारिवाद्यासव, गंधक रसायन या अविपत्तिकर चूर्ण लिया जा सकता है।
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जीवनशैली में बदलाव
- कॉटन के जूते या सैंडल पहनें ताकि हवा का संचार हो सके।
- देर रात तक जागने से बचें, क्योंकि यह पित्त को बढ़ाता है।
- योग में शीतली और शीतकारी प्राणायाम करें।
- विटामिन बी12, आयरन और कैल्शियम का स्तर नियमित रूप से जांचें।
- ध्यान और मेडिटेशन से मानसिक शांति बनाए रखें।
पैरों के तलवों में जलन केवल थकान नहीं, बल्कि शरीर के भीतर असंतुलन का संकेत हो सकती है। इसे अनदेखा करने के बजाय समय रहते कारण पहचानना और संतुलित आहार, जीवनशैली तथा आयुर्वेदिक उपचार अपनाना आवश्यक है।
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