पूर्व क्रिकेट कप्तान अजहरुद्दीन की नई इनिंग — अब मंत्री के रूप में शुरुआत

Mohammad Azharuddin: भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और कांग्रेस नेता मोहम्मद अजहरुद्दीन ने शुक्रवार को तेलंगाना की रेवंत रेड्डी सरकार में मंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने राजभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के दौरान अजहरुद्दीन ने “अल्लाह के नाम पर” शपथ ली और अंत में “जय तेलंगाना” तथा “जय हिंद” के नारे लगाए।

समारोह में मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क, विधानसभा अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार, विधान परिषद के चेयरमैन जी. सुखेन्द्र रेड्डी, टीपीसीसी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ सहित कई वरिष्ठ नेता उपस्थित रहे। इस मौके पर अजहरुद्दीन के बेटे मोहम्मद असदुद्दीन भी मौजूद थे, जिन्हें हाल ही में तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) का महासचिव नियुक्त किया गया है।

राज्यपाल कोटे से बने विधान परिषद सदस्य
राज्य कैबिनेट ने अगस्त में अजहरुद्दीन को राज्यपाल के कोटे से विधान परिषद सदस्य के रूप में नामित करने का निर्णय लिया था। इसके बाद उनके मंत्री पद की संभावना को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। माना जा रहा है कि उन्हें अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की जिम्मेदारी दी जाएगी।

62 वर्षीय अजहरुद्दीन फिलहाल टीपीसीसी के कार्यकारी अध्यक्ष और राजनीतिक मामलों की समिति के सदस्य हैं। उन्हें जुबली हिल्स विधानसभा क्षेत्र के आगामी उपचुनाव (11 नवंबर) से पहले कैबिनेट में शामिल किया गया है। कांग्रेस का यह कदम रणनीतिक माना जा रहा है, क्योंकि जुबली हिल्स क्षेत्र में लगभग 30 प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं।


कांग्रेस की रणनीतिक चाल
रेवंत रेड्डी की सरकार बनने के बाद अब तक कैबिनेट में कोई मुस्लिम चेहरा शामिल नहीं था। इसको लेकर कांग्रेस सरकार को अल्पसंख्यक समुदाय से आलोचना झेलनी पड़ी थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजहरुद्दीन को मंत्री बनाना कांग्रेस की “मुस्लिम आउटरीच रणनीति” का हिस्सा है। 2023 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के सभी प्रमुख मुस्लिम उम्मीदवार हार गए थे। ऐसे में अजहरुद्दीन की लोकप्रियता और सार्वजनिक छवि पार्टी के लिए मददगार साबित हो सकती है।

भाजपा का कड़ा विरोध
इस बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने चुनाव आयोग से कैबिनेट विस्तार को रोकने की मांग की है। भाजपा का कहना है कि अजहरुद्दीन को उपचुनाव से पहले मंत्री बनाना आचार संहिता का उल्लंघन है और इससे एक विशेष समुदाय के मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

अजहरुद्दीन का राजनीतिक सफर
मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 2009 में कांग्रेस पार्टी जॉइन की थी और उसी वर्ष उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें राजस्थान के टोंक-सवाई माधोपुर सीट से टिकट मिला, लेकिन वे हार गए।
2018 में उन्हें तेलंगाना कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया, जहां उन्होंने विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए सक्रिय प्रचार किया। हालांकि, पार्टी ने उन्हें न तो विधानसभा और न ही लोकसभा टिकट दिया।

यह भी पढ़ें…

प्रशासनिक चूक से चाईबासा सदर अस्पताल में हुई 5 बच्चों की मौत, कार्रवाई का भरोसा

खेल से राजनीति तक
भारत के सबसे सफल क्रिकेट कप्तानों में शामिल अजहरुद्दीन ने 1985 से 2000 के बीच भारतीय टीम का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने करियर में 99 टेस्ट और 334 वनडे मैच खेले। क्रिकेट के बाद राजनीति में उनका सफर कई उतार-चढ़ावों से गुज़रा है, लेकिन कांग्रेस के साथ उनका जुड़ाव लगातार बना रहा।

यह भी पढ़ें…

Sonam Wangchuck Case की सुनवाई टली, अब 24 नवंबर को होगी अगली कार्यवाही

अल्पसंख्यक समाज में उम्मीदें
अजहरुद्दीन के मंत्री बनने से तेलंगाना के मुस्लिम समुदाय में उत्साह देखा जा रहा है। समुदाय के नेताओं का कहना है कि इससे अल्पसंख्यक कल्याण नीतियों को गति मिलेगी। वहीं, कांग्रेस के लिए यह फैसला उपचुनाव से पहले एक राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है — कि पार्टी सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह भी पढ़ें…

अब महिलाएं रात की शिफ्ट में भी कर सकेंगी काम, जम्मू-कश्मीर सरकार लाएगी संशोधन विधेयक

Back to top button