भव्य स्वागत से लेकर राजघाट तक… भारत-रूस साझेदारी के 25 साल पर दिखी नई मजबूती

Vladimir Putin India Visit: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा शुक्रवार को अपने औपचारिक, कूटनीतिक और रणनीतिक चरम पर पहुंच गई। यह यात्रा गुरुवार देर शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर निजी रात्रिभोज के साथ शुरू हुई थी, जबकि शुक्रवार सुबह राष्ट्रपति भवन में हुए भव्य सेरेमोनियल वेलकम ने दोनों देशों के संबंधों की ऐतिहासिक गहराई और रणनीतिक महत्व को स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया।

राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत, 21 तोपों की सलामी और गार्ड ऑफ ऑनर
सुबह राष्ट्रपति भवन के फोरकोर्ट में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुतिन का गर्मजोशी से स्वागत किया। समारोह में तीनों सेनाओं ने पुतिन को गार्ड ऑफ ऑनर दिया, जो किसी भी राष्ट्रप्रमुख के लिए भारत का सर्वोच्च राजकीय सम्मान माना जाता है।

राष्ट्रपति अंगरक्षक दल और घुड़सवारों की भव्य उपस्थिति, 21 तोपों की सलामी और सैन्य टुकड़ियों की परेड ने इस यात्रा के महत्व को और अधिक रेखांकित किया। पुतिन ने परेड का निरीक्षण किया और भारतीय सैन्य टुकड़ियों का अभिवादन स्वीकार किया।

दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारियों से परिचय का दौर
औपचारिक स्वागत के बाद परिचय का चरण शुरू हुआ। भारतीय मंत्रिमंडल के प्रमुख सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों से पुतिन का परिचय कराया गया। इसके बाद पुतिन ने अपने प्रतिनिधिमंडल के शीर्ष अधिकारियों को राष्ट्रपति मुर्मू और पीएम मोदी से मिलवाया।

यह चरण दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संवाद और संस्थागत साझेदारी की मजबूती को दर्शाता है।

पुतिन राजघाट पहुंचे, महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि
स्वागत समारोह के बाद पुतिन राजघाट के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने उनकी अगवानी की और राजकीय प्रोटोकॉल की जानकारी दी।

पुतिन ने रूसी झंडे के रंगों से सजा पुष्प-चक्र समाधि स्थल पर अर्पित किया और सिर झुकाकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने गुलाब की पंखुड़ियां चढ़ाकर गांधीजी को नमन किया।

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पुतिन ने विजिटर बुक में क्या लिखा?
रूसी राष्ट्रपति ने अपनी टिप्पणी में महात्मा गांधी के शांति, मानवता और सदाचार पर आधारित विचारों को आधुनिक समय में भी उतना ही प्रासंगिक बताया जितना उनके जीवनकाल में थे। उन्होंने लिखा कि गांधीजी ने एक ऐसे वैश्विक व्यवस्था की कल्पना की थी जिसमें समानता, पारस्परिक सम्मान और बहुध्रुवीयता के सिद्धांत हों — और आज वही दुनिया आकार ले रही है।

उन्होंने रूसी दार्शनिक लियो टॉल्स्टॉय और गांधीजी के ऐतिहासिक पत्राचार का भी ज़िक्र किया, जिसने विश्व शांति और मानवता को नई दिशा दी थी।

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दिल्ली सजी भारत-रूस मैत्री के रंगों में
इस यात्रा के मद्देनज़र दिल्ली के लुटियंस ज़ोन को विशेष रूप से सजाया गया है। तीन मूर्ति मार्ग, राजपथ-एक्सटेंशन, राष्ट्रपति भवन और राजघाट तक भारतीय और रूसी झंडों की कतारों ने इस पूरी यात्रा को विशेष औपचारिकता प्रदान की।

यह यात्रा इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इस वर्ष भारत–रूस रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

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