
गट माइक्रोबायोम से मिल सकती है मानसिक बीमारियों में राहत, शोध में आया नया संकेत
Gut Health: दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अनुमान है कि लगभग हर सात में से एक व्यक्ति मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों जैसे डिप्रेशन, एंग्जायटी और अन्य मानसिक बीमारियों से प्रभावित है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए नए और प्रभावी इलाज की जरूरत है।
इसी दिशा में साउथ ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पेट और दिमाग के बीच संबंध पर शोध किया और पाया कि पेट में मौजूद छोटे-छोटे जीवाणु यानी गट माइक्रोबायोम मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं।
पेट और दिमाग के बीच जटिल कनेक्शन
नेचर मेंटल हेल्थ पत्रिका में प्रकाशित शोध के अनुसार, पेट और दिमाग के बीच एक गहरा और जटिल संबंध मौजूद है। पेट के जीवाणु दिमाग को सीधे प्रभावित करते हैं, जो मूड, तनाव और सोचने की क्षमता में बदलाव ला सकते हैं। प्रमुख लेखक श्रीनिवास कामथ ने बताया, “पेट में रहने वाले ट्रिलियन्स माइक्रोब्स दिमाग से कई तरह से जुड़े रहते हैं। ये जीव पेट में बनने वाले रसायनों को दिमाग तक पहुंचाते हैं, जो मूड को बेहतर या खराब कर सकते हैं।”
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह बदलाव मानसिक बीमारियों को पैदा करते हैं या शरीर की किसी और समस्या का संकेत होते हैं।
जानवरों और मानव अध्ययन में मिले संकेत
शोधकर्ताओं ने कई जानवरों पर किए गए अध्ययनों की समीक्षा की। इसमें यह देखा गया कि पेट के जीवाणु:
- दिमाग की रसायन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।
- तनाव के जवाब और व्यवहार में बदलाव ला सकते हैं।
- डिप्रेशन और सिज़ोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारियों में उनके पैटर्न में गड़बड़ी पाई गई।
यह दर्शाता है कि मानसिक स्वास्थ्य और पेट के जीवाणुओं के बीच सीधे संबंध हो सकता है।
पेट की सेहत के लिए करें ये काम
शोध में यह भी पाया गया कि प्रोबायोटिक्स, आहार में बदलाव और मल प्रत्यारोपण जैसे उपचार मूड और एंग्जायटी जैसी समस्याओं को कम करने में मदद कर सकते हैं। कई मानसिक दवाएं भी पेट के माइक्रोबायोम को प्रभावित करती हैं, जो इस कनेक्शन को और मजबूत बनाता है।
- अच्छी नींद: गट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए रोज़ाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद ज़रूरी है. जब आप अच्छी नींद लेते हैं, तो आपकी पाचन प्रक्रिया भी बेहतर ढंग से काम करती है.
- व्यायाम: शरीर को एक्टिव रखना गट के लिए फायदेमंद होता है. रोज़ाना हल्की-फुल्की कसरत करें या फिर 30 से 45 मिनट तेज़ चल सकते हैं, दौड़ सकते हैं या साइकलिंग कर सकते हैं.
- आपकी डाइट: गट हेल्थ का सीधा संबंध आपकी डाइट से है. कोशिश करें कि फाइबर से भरपूर चीजें जैसे फल, सब्जियां और साबुत अनाज ज़्यादा खाएं
- पानी का सेवन: गट को सही तरीके से काम करने के लिए दिन में कम से कम ढाई से तीन लीटर पानी पीने की कोशिश करें.
- तनाव से दूर रहें: स्ट्रेस का सीधा असर पेट पर पड़ता है, इसलिए इसे हल्के में न लें. तनाव से दूर रहें.
- स्क्रीन टाइम: कोशिश करें कि दिन का कुछ समय बिना स्क्रीन के बिताएं – किताब पढ़ें, टहलें या दोस्तों-परिवार से बात करें.
- मूड: पेट और मन का गहरा रिश्ता है. जब आप खुश रहते हैं, तो आपकी गट भी सही तरीके से काम करती है. तो बेहतर होगा अपनी पसंद की चीजों में मन लगाएं
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वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य चुनौती
वर्तमान में दुनिया भर में लगभग 97 करोड़ लोग मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों से जूझ रहे हैं, जिनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी सबसे बड़ी समस्याएं हैं। मौजूदा दवाओं और उपचारों से लगभग एक-तिहाई मरीजों को कोई खास फायदा नहीं होता, इसलिए ऐसे नए और सस्ते इलाज की तलाश जरूरी है जो अधिक लोगों तक पहुंच सकें।
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भविष्य की संभावनाएं
शोध के सह-लेखक डॉ. पॉल जॉयस ने कहा, “हम यह साबित कर सकते हैं कि पेट के जीवाणु मानसिक बीमारियों में सीधे भूमिका निभाते हैं। माइक्रोबायोम आधारित इलाज मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।” उन्होंने आगे कहा कि प्रोबायोटिक्स, प्रीबायोटिक्स और खास तरह के आहार सस्ते, सुरक्षित और आसान विकल्प हो सकते हैं, जिन्हें अलग-अलग संस्कृतियों और समाजों में भी अपनाया जा सकता है।
यह शोध मानसिक स्वास्थ्य के उपचार और रोकथाम में एक नई दिशा खोल सकता है और भविष्य में माइक्रोबायोम आधारित उपचारों के माध्यम से लाखों लोगों को राहत मिल सकती है।
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