
Tariff की मार के बाद H-1B Visa ने बिगाड़ा रुपये का खेल… सितंबर की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज
Rupee hits Record low: भारतीय रुपया मंगलवार को दोपहर के कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88.76 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों के अनुसार रुपये की इस कमजोरी के पीछे मुख्य वजह अमेरिका की नई नीतियां हैं, जिनमें एच-1बी वीजा शुल्क में बढ़ोतरी और भारत पर टैरिफ में इजाफा शामिल है। इसका सीधा असर भारतीय आईटी कंपनियों के मुनाफे और विदेशी निवेशकों के भरोसे पर पड़ा है।
विदेशी निवेशकों का रुख बदला
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) लगातार डॉलर खरीद रहे हैं और भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकाल रहे हैं। सिर्फ दो दिनों में एफपीआई ने 2,900 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए हैं। उनका कहना है कि वीजा शुल्क और टैरिफ के चलते निवेशक अपने धन को पश्चिमी बाजारों में शिफ्ट कर रहे हैं।
H-1B Visa ने बिगाड़ा रूपये का खेल
विशेषज्ञों का मानना है कि वीजा शुल्क में बढ़ोतरी से भारतीय आईटी कंपनियों की लागत बढ़ेगी और उनकी प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित होगी। रॉयटर्स से बातचीत में एएनजेड बैंक के विदेशी मुद्रा रणनीतिकार धीरज निम ने कहा, “टैरिफ 50% तक बढ़ने और वीजा से जुड़ी खबरों ने इक्विटी प्रवाह को खासकर आईटी क्षेत्र में कमजोर किया है, जिससे रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।”
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एशियाई मुद्राओं पर भी असर
रुपये की यह कमजोरी केवल भारत तक सीमित नहीं है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, इंडोनेशियाई रुपिया 0.36 प्रतिशत, थाई बाट 0.22 प्रतिशत, फिलीपीन पेसो 0.17 प्रतिशत और दक्षिण कोरियाई वॉन 0.14 प्रतिशत कमजोर हुए हैं।
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सितंबर में सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट
बाजार के आंकड़ों के मुताबिक रुपये ने दोपहर तक 88.7238 पर कारोबार किया। शुरुआती कारोबार में यह 88.4137 पर खुला था, जबकि सोमवार को बंद होने पर यह 88.3163 पर था। डॉलर के मुकाबले यह 0.51 प्रतिशत की गिरावट है, जो सितंबर में अब तक की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट मानी जा रही है।
बैंक ऑफ बड़ौदा इंडिया इकोनॉमिक्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि वीजा और टैरिफ नीतियों की वजह से रुपया फिलहाल दबाव में रहेगा। साथ ही विदेशी निवेशकों द्वारा इस साल अब तक 15 अरब डॉलर से ज्यादा की बिकवाली चिंता और बढ़ा रही है।
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