इस दिन है हरतालिका तीज, जानें पूजन का शुभ मुहूर्त व पर्व की कथा

हरतालिका तीज 2021

महिलाओं के कठोर व्रत-उपवास का पर्व हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होता है। इस साल यह तिथि 9 सितंबर दिन गुरुवार को पड़ रही है।

इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की सुरक्षा और अपने अखंड सौभाग्यवती होने का व्रत रखती हैं। वहीं कुवांरी कन्याएं यह व्रत अपने मन पसंद अर्थात मनवांछित वर प्राप्त करने के लिए रखती है। इस दिन महिलाएं सारा दिन बिना कुछ भी ग्रहण किये हुए निर्जला व्रत रखती है।

बन रहा रवियोग 

हरतालिका तीज पर रवियोग 14 वर्ष बाद चित्रा नक्षत्र के कारण बन रहा है, जो 9 सितंबर दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से अगले दिन 10 सितंबर 12 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।

हरतालिका तीज का अति शुभ समय शाम 5 बजकर 16 मिनट से शाम को 6 बजकर 45 मिनट तक है। वहीं शुभ समय 6 बजकर 45 मिनट से 8 बजकर 12 मिनट तक है।

हरतालिका व्रत की पूजा के समय रवियोग रहेगा। महिलाएं विधि पूर्वक पूर्व अथवा उत्तर दिशा की और मुख करके मां पार्वती और भगवान शिव का पूजन करें। इस बार हरतालिका तीज गुरुवार के दिन पड़ने के कारण भगवान विष्णु की भी कृपा प्राप्त होगी।

हरतालिका पर्व की कथा

पौराणिक ग्रंथों में इस हरतालिका पर्व की कथा है कि दक्ष प्रजापति की पुत्री सती भगवान शिव की अर्धांगिनी थीं, लेकिन पिता दक्ष द्वारा शिव की उपेक्षा से क्षुब्ध होकर उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी। वह पुन: पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लेकर पार्वती बनीं।

ऋषि नारद के कहने पर हिमालय पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से करना चाह रहे थे, किंतु पार्वती की इच्छा को देखते हुए उनकी सखियां उनका हरण कर घने जंगल की एक गुफा में ले गईं, जहां पार्वती ने शिवलिंग की स्थापना भाद्रपद शुक्लपक्ष की तृतीया तिथि को करके कठोर साधना शुरू की।

पुन: विवाह न करने के प्रण के उपरांत भी शिव जी को पार्वती की कठोर तपस्या के कारण उन्हें अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार करना पड़ा।

यही कारण है कि हरितालिका तीज को महिलाएं कठोर व्रत रखती हैं, ताकि वे उत्तम पति प्राप्त कर सकें और विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु व अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं।

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