BJO report: बढ़ता स्क्रीन टाइम आंखों का दुश्मन…2050 तक हर दूसरा बच्चा बनेगा ‘चश्मिश’?

Children myopia risk BJO report: बच्चों की भी पढ़ाई से लेकर एंटरटेंमेंट तक सबकुछ फोन या लैप्टॉप पर काफी निर्भर है। ऐसे में बढ़ते स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों की आंखों को नुकसान पहुंच रहा है।

Children myopia risk BJO report: हाल ही में जापान के एक शहर ने बड़ा फैसला लिया, ये कि बच्चों और वयस्कों के स्क्रीन टाइम को घटाया जाएगा। जापान के आइची प्रांत के टोयोआके शहर की स्थानीय असेंबली ने इसी साल 30 सितंबर को एक अध्यादेश पारित किया जिसके तहत लोग रोज काम या पढ़ाई के अलावा सिर्फ दो घंटे ही मोबाइल, कंप्यूटर या टैबलेट चला पाएंगे। इस आदेश ने 2024 की एक रिपोर्ट की याद दिला दी।  तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल एक ओर जहां बच्चों के लिए नए अवसरों के दरवाजे खोल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके आंखों के स्वास्थ्य (Children’s Eye Care) के लिए एक बड़ी चिंता भी पैदा कर रहे हैं।

ब्रिटिश जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी की रिपोर्ट

दरअसल, ब्रिटिश जर्नल ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी की रिपोर्ट का प्रकाशन करने से पूर्व कुल 276 अध्ययनों के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया, जिनमें यूरोप, उत्तर और दक्षिण अमेरिका, एशिया, अफ्रीका और ओशिनिया के 50 देशों के पांच मिलियन से अधिक बच्चे और किशोरों को शामिल किया गया था। इनमें लगभग 2 मिलियन को मायोपिया था।

जापान में इसी साल जुलाई-अगस्त में डेटाबेस स्टडी के आधार पर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। ये स्टडी अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी में प्रकाशित हुई। रिपोर्ट से पता चला कि जापान में, 6 से 11 वर्ष के बच्चों में 77 फीसदी और 12 से 14 वर्ष के बच्चों में 95 फीसदी मायोपिया के शिकार हैं। यह वृद्धि मुख्यतः बच्चों के आउटडोर गतिविधियों में कमी और डिजिटल डिवाइस के बढ़ते उपयोग के कारण हो रही है।

दुनिया भर में चिंता का कारण

बच्चों की गतिविधियों के कारण आंख पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों से जुड़े सभी तथ्य दुनिया भर में चिंता का कारण हैं। एक अध्ययन में पाया गया कि प्रतिदिन एक घंटे का अतिरिक्त स्क्रीन टाइम बच्चों में मायोपिया के जोखिम को 21फीसदी बढ़ा देता है। जापानी एक्सपर्ट्स ने अपने अध्ययन में जेनेटिक के अलावा आउटडोर खेलों में कमी और स्क्रीन टाइम में वृद्धि को सेहत के लिए खतरनाक माना। उन्होंने कहा कि इससे नींद की कमी आती है, मानसिक तौर पर आप थके हुए रहते हैं, और शारीरिक गतिविधियों में कमी जैसी समस्याएं भी उत्पन्न होती हैं, जो मायोपिया के जोखिम को और बढ़ाती हैं।

अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत

अध्ययन और जापान के शहर टोयोआके में उठाए गए कदम वाकई आंखें खोलने वाले हैं। उन अभिभावकों के लिए जो रोते हुए या फिर बच्चे की जिद का सम्मान करते हुए मोबाइल थमा देते हैं। बच्चे की आंखें रोशन रहें इसका उपाय भी ये अध्ययन देते हैं। बस इसके लिए करना ये है कि उन्हें आउटडोर गेम्स के लिए भेजना है। कम से कम दो घंटे उन्हें इंटरनेट की दुनिया से दूर रखें। इसके अलावा, जैसे जापान ने किया है, स्क्रीन टाइम सीमित करना है, आंखों का रेगुलर चेकअप कराना है और सबसे जरूरी बात, आंखों की अहमियत बड़े प्यार से उन्हें समझानी है।

 

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