
झारखंड निकाय चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, 14 सितंबर को आरोप गठन की चेतावनी
Jharkhand News: झारखंड में लंबे समय से लंबित नगर निकाय चुनाव को लेकर गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और साफ कहा कि अदालत के आदेश के बावजूद चुनाव न कराना न्यायालय की अवमानना है।
अदालत की नाराजगी
सुनवाई के दौरान राज्य की मुख्य सचिव अलका तिवारी और नगर विकास सचिव अदालत में मौजूद थे। सरकार की ओर से दलील दी गई कि चुनाव से पहले एक बार फिर से ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इस पर अदालत ने तीखी टिप्पणी की और कहा कि सरकार कानून के साथ खिलवाड़ कर रही है और जानबूझकर चुनाव टालने की कोशिश कर रही है।
पांच साल से टल रहे हैं चुनाव
गौरतलब है कि झारखंड में आखिरी नगर निकाय चुनाव 2018 में हुए थे। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार हर पांच साल पर चुनाव होना अनिवार्य है। बावजूद इसके, राज्य सरकार ने ओबीसी आरक्षण को आधार बनाकर अब तक चुनाव नहीं कराया। अदालत कई बार चुनाव कराने का निर्देश दे चुकी है, लेकिन प्रक्रिया पूरी न होने के कारण मामला अब अवमानना याचिका तक पहुंच गया है।
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अधिकारियों को तलब, आरोप गठन की चेतावनी
अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 14 सितंबर तय की है और इस दिन तत्कालीन नगर विकास सचिव विनय चौबे, अपर सचिव ज्ञानेश कुमार, कार्मिक सचिव वंदना दादेल, वर्तमान नगर विकास सचिव और मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी चेतावनी दी है कि इन अधिकारियों पर आरोप गठन की कार्रवाई की जाएगी।
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संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा पर सवाल
अदालत की सख्त टिप्पणी ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। चुनाव न कराने की वजह से न सिर्फ लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है बल्कि इससे संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा भी दांव पर लगी है।
साफ है कि अगर सरकार ने अब ठोस कदम नहीं उठाए, तो झारखंड के शीर्ष अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई तय मानी जाएगी।
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