यूपी का फार्मूला अब पंजाब में लागू करेगी बसपा, विस चुनाव के लिए बनाई यह खास रणनीति

akali dal bsp alliance

चंडीगढ़। बहुजन समाज पार्टी अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में दमदार प्रदर्शन की तैयारी में जुटी हुई है। इसके लिए बनाई गई खास रणनीति के तहत पार्टी उप्र की तर्ज पर यहां सभी वर्गों को साथ लेकर अपना दायरा बढाएगी।

इसी रणनीति के तहत अब तक दलित राजनीति में सक्रिय रहने वाली बसपा अब पंजाब में सर्व धर्म की बात करने लगी है।

शिरोमणि अकाली दल के साथ समझौते के बाद बसपा 24 सालों से पंजाब विधानसभा में अपना सूखा खत्म करने की कोशिश में है।

बसपा जिन 20 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, उसमें से 12 सीटें जनरल कोटे से हैं। इन सीटों पर दमदार उपस्थिति दर्ज करवाने के लिए बसपा सभी वर्गो को प्रतिनिधित्व देने के लिए सक्रिय हो गई है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार उत्तर प्रदेश में सर्व धर्म की नीति अपनाने वाली बसपा पंजाब में भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ेगी। इसे लेकर बसपा प्रमुख मायावती ने पार्टी के महासचिव सतीश मिश्रा को ब्राह्मण समाज से संपर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी है।

बसपा के प्रदेश अध्यक्ष जसबीर सिंह गढ़ी ने कहा कि जो नीति उत्तर प्रदेश में अपनाई जा रही है वही पंजाब में भी लागू होगी। बसपा समाज के हरेक वर्ग को साथ में लेकर सर्व धर्म की बात करती है।

बसपा ने 1992 में पंजाब में नौ सीटें जीतकर सबको चौंका दिया था। उस समय शिरोमणि अकाली दल ने इस चुनाव का बहिष्कार किया था और कांग्रेस ने सबसे अधिक 87 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद 1997 में बसपा फिर एक सीट पर सिमट गई।

पिछले चार विधानसभा चुनाव में बसपा खाता भी नहीं खोल पाई। 20 वर्षों में पंजाब में बसपा की छवि वोटकटवा के रूप में बनी रही, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव को लेकर अकाली दल से समझौता होने के बाद पार्टी में एक बार फिर से नया उत्साह देखने को मिल रहा है।

ये जनरल सीटें आईं बसपा के हिस्से

शिरोमणि अकाली दल के साथ हुए समझौते के बाद बसपा को 20 सीटें मिली हैं। इनमें जालंधर नार्थ, होशियारपुर, उड़मुड़, दसूहा, नवांशहर, लुधियाना (नार्थ), पठानकोट, सुजानपुर, श्री आनंदपुर साहिब, अमृतसर (नार्थ), अमृतसर (सेंट्रल) और एसएएस नगर (मोहाली) 12 जनरल सीटें भी शामिल हैं।

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