
ASEAN मंच से भारत ने दिया संदेश… मुक्त नेविगेशन और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हो सम्मान
Rajnath Singh Malaysia Visit: भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करते हुए आसियान देशों के रक्षा मंत्रियों की अनौपचारिक बैठक में काउंटर टेररिज्म, आपदा राहत और समुद्री सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर जोर दिया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर स्पष्ट कहा कि भारत क्षेत्र में स्थिरता, नियम-आधारित व्यवस्था और पारस्परिक सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है।
आतंकवाद के खिलाफ भारत का कड़ा रुख
राजनाथ सिंह ने कहा कि आतंकवाद आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और इससे निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है। भारत आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी निंदा करता है और किसी भी प्रकार की हिंसक उग्रवादी गतिविधियों का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा कि भारत अपने अनुभव और क्षमताओं के साथ आतंक-विरोधी अभियानों और सूचना साझा करने में आसियान देशों की मदद करता रहेगा।
समुद्री सुरक्षा और दक्षिण चीन सागर में स्वतंत्र नौवहन पर जोर
भारत ने दक्षिण चीन सागर में मुक्त नेविगेशन (Free Navigation) और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के पालन की आवश्यकता पर बल दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि यह क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग है, इसलिए सभी देशों को नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। भारत ने आसियान देशों के साथ समुद्री सुरक्षा, निगरानी और क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में सहयोग का आश्वासन दिया।
आपदा राहत और मानवीय सहायता में भारत की भूमिका
भारत ने आपदा राहत और मानवीय सहायता के क्षेत्र में अपने योगदान को भी रेखांकित किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने बीते वर्षों में कई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आसियान देशों को सहायता दी है — चाहे वह राहत सामग्री भेजना हो या बचाव दलों की तैनाती। उन्होंने बताया कि भारत का लक्ष्य “सहयोग, सहभागिता और साझा सुरक्षा” के सिद्धांत पर आधारित है।
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मलेशिया और अमेरिका से अहम द्विपक्षीय मुलाकातें
राजनाथ सिंह ने मलेशिया के रक्षा मंत्री मोहम्मद खालिद नोरदिन के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें रक्षा सहयोग, संयुक्त अभ्यास, और रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संभावनाओं पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने रक्षा उद्योगों के बीच आपसी निवेश और तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा देने पर सहमति जताई।
इसी क्रम में, राजनाथ सिंह ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ से भी भेंट की। इस मुलाकात में भारत और अमेरिका ने 10 वर्षों की अवधि वाले ‘फ्रेमवर्क फॉर द यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप’ पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को नीति-आधारित दिशा प्रदान करेगा।
राजनाथ सिंह ने कहा, “यह फ्रेमवर्क भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम को नीतिगत दिशा देगा। यह साझेदारी के नए दशक की शुरुआत करेगा और हमारे रणनीतिक तालमेल को और सशक्त बनाएगा।”
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भारत-आसियान रक्षा संवाद में नई ऊर्जा
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत-आसियान संबंध सिर्फ आर्थिक या कूटनीतिक तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह साझा सांस्कृतिक और ऐतिहासिक बंधनों पर भी आधारित हैं। उन्होंने कहा कि भारत आसियान देशों के साथ रक्षा संवाद को और व्यापक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र को स्वतंत्र, खुला और नियम-आधारित बनाया जा सके।
भारत का व्यापक दृष्टिकोण
भारत ने इस बैठक के जरिए यह संकेत दिया है कि वह क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा में सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभा रहा है। काउंटर टेररिज्म से लेकर समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग तक, भारत अब केवल एक सहभागी नहीं, बल्कि एक सुरक्षा प्रदाता (Security Provider) की भूमिका निभा रहा है।
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