
Plane Crash: रांची से दिल्ली मरीज को लाते समय एयर एंबुलेंस क्रैश, पायलट समेत 7 की मौत
Ranchi Plane Crash: सोमवार की रात हुए एयर एंबुलेंस हादसे में जान गंवाने वाले सभी सात लोगों के शव मंगलवार सुबह सदर अस्पताल पहुंचते ही मातम छा गया। पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल टीम का गठन कर दिया गया है।
Ranchi Plane Crash: रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस सोमवार देर शाम करीब 7:30 बजे चतरा में क्रैश हो गई। विमान में मरीज समेत कुल सात लोग सवार थे। इस हादसे में सभी सात लोगों की मौत हो गई। चतरा एसपी सुमित अग्रवाल ने बताया कि एयर एंबुलेंस क्रैश होकर सिमरिया के जंगल में गिरी है। इस हादसे में संजय कुमार नाम के मरीज की भी मौत हो गई जो ढाबे में भीषण आग लगने के कारण झुलस गए थे और दिल्ली इलाज करवाने के लिए जा रहे थे।
6 पॉइंट्स में समझते हैं कि हादसा कब, कहां और कैसे हुआ?
- हादसे की जगह और समय: प्लेन रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से शाम 7:11 बजे उड़ा था. ये झारखंड के चतरा जिले में क्रैश हुआ, जहां सभी 7 लोगों की मौत हो गई.
- प्लेन की डिटेल्स: ये बीचक्राफ्ट C90 मॉडल का प्लेन था, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-AJV है. इसे दिल्ली बेस्ड रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड ऑपरेट कर रही थी.
- मौसम का रोल: कोलकाता ATC से संपर्क करने के बाद प्लेन ने मौसम की वजह से रूट डेविएशन की रिक्वेस्ट की. शाम 7:34 बजे कोलकाता से संपर्क और रडार कॉन्टैक्ट टूट गया, जो वाराणसी से करीब 100 NM साउथ-ईस्ट में था.
- मरने वालों की पहचान: मरीज संजय कुमार (41 साल, 63% जलने की चोटें), डॉक्टर विकास कुमार गुप्ता, पैरामेडिकल सचिन कुमार मिश्रा, अटेंडेंट अर्चना देवी और धुरु कुमार, पायलट विवेक विकास भगत और सवरजदीप सिंह शामिल हैं.
- कंपनी की बैकग्राउंड: रेडबर्ड एयरवेज 2018 में अक्षय कुमार ने शुरू की थी. 2019 में इसे नॉन-शेड्यूल्ड फ्लाइट्स (चार्टर और एयर एम्बुलेंस) का परमिट मिला. कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक, ये 24/7 मेडिकल इवैक्यूएशन सर्विस देती है, जिसमें एडवांस्ड लाइफ-सेविंग इक्विपमेंट होते हैं.
- फ्लीट और बड़ा बैकग्राउंड: कंपनी के पास 7 प्लेन हैं, जिसमें Embraer Legacy 600 और Dassault Falcon 2000 शामिल हैं. ये क्रैश चार्टर्ड जेट ऑपरेटर्स पर सवाल उठा रहा है, खासकर जनवरी में बारामती में लियरजेट क्रैश के बाद, जहां महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार समेत 5 लोग मारे गए थे.
शार्ट सर्किट में झुलसने के बाद ले जाया जा रहा था दिल्ली
पेशे से ढाबा चलाने वाले संजय कुछ दिन पहले गंभीर रूप से झुलस गए थे। हादसे में उन्हें इलेक्ट्रिक बर्न हुआ था, जिससे उनका शरीर 65 फीसदी बुरी तरह जल गया था। परिजनों ने उन्हें तुरंत रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पिछले करीब दस दिनों से उनका इलाज चल रहा था।
जिंदगी बचाने का सफर बनी आखिरी उड़ान
एयर एंबुलेंस की बुकिंग के बाद परिवार में एक बार फिर उम्मीद की किरण जगी। सभी को भरोसा था कि राजधानी में बेहतर इलाज से संजय की जिंदगी बच जाएगी। इसी उम्मीद के साथ मरीज को एयर एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया। उनके साथ परिजन भी इस उड़ान में सवार हुए, दिल में दुआ और आंखों में उम्मीद लिए। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
दिल्ली की ओर बढ़ती यह उड़ान अचानक एक दर्दनाक हादसे में बदल गई। एयर एंबुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो गया और पलक झपकते ही जिंदगी बचाने की कोशिश कर रहे सभी लोग मौत के आगोश में समा गए। जिस उड़ान से जीवन की नई शुरुआत की उम्मीद थी, वही अंतिम सफर साबित हुई।





