एयर पावर में भारत बड़ी छलांग… यूरोप के साथ FCAS बनाने की तैयारी

Sixth Gen Fighter Jet FCAS: भारत अब सैन्य तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। देश छठी पीढ़ी (Sixth Generation) के लड़ाकू विमान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इस परियोजना को फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) के रूप में विकसित करने की योजना है, जिसके लिए भारत यूरोपीय देशों के साथ सहयोग करने पर विचार कर रहा है।

इस महत्वाकांक्षी योजना के संकेत हाल ही में रक्षा मंत्री Rajnath Singh के स्तर पर मिले हैं। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार भारत ने इस अत्याधुनिक फाइटर जेट प्रोग्राम पर शुरुआती पहल शुरू कर दी है।

क्या है FCAS प्रोग्राम?
Future Combat Air System एक ऐसा उन्नत लड़ाकू विमान कार्यक्रम है, जिसमें सिर्फ एक फाइटर जेट ही नहीं बल्कि कई आधुनिक तकनीकों का संयोजन होगा। इसमें मानव चालित लड़ाकू विमान, ड्रोन स्वार्म, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमता शामिल होगी।

यह तकनीक अभी दुनिया में पूरी तरह विकसित नहीं हुई है और इस पर कई बड़ी सैन्य शक्तियां काम कर रही हैं।

अमेरिका और चीन भी कर रहे काम
छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की दौड़ में फिलहाल कई बड़े देश शामिल हैं।

  • United States अपने NGAD (Next Generation Air Dominance) प्रोग्राम पर काम कर रहा है।
  • China भी अपने छठी पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में शोध कर रहा है।

हालांकि अभी तक किसी भी देश ने पूरी तरह ऑपरेशनल छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान तैयार नहीं किया है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट
भारत के लिए यह परियोजना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि यह कार्यक्रम सफल होता है तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जिनके पास छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की तकनीक होगी।

इसके अलावा यह परियोजना भारतीय रक्षा उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और निजी कंपनियों के लिए भी बड़े अवसर लेकर आएगी।

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2043 तक IAF को मिल सकता है FCAS
भारत ने फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन के साथ अच्छी पार्टनरशिप निभाई है और अब वह भारत में प्रोडक्शन पर भी काम कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अगर भारत और यूरोप में छठी पीढ़ी के फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम बनाने पर सहमति बनी तो भारतीय वायु सेना को यह 2042 से 2043 तक मिल सकता है।

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भविष्य की हवाई युद्ध प्रणाली
विशेषज्ञों के अनुसार छठी पीढ़ी के फाइटर जेट पारंपरिक लड़ाकू विमानों से कहीं अधिक उन्नत होंगे। इनमें स्टील्थ तकनीक, हाइपर-कनेक्टेड नेटवर्क, लंबी दूरी के हथियार और AI आधारित निर्णय प्रणाली शामिल होंगी।

यदि भारत इस परियोजना में यूरोपीय देशों के साथ साझेदारी करता है तो इससे तकनीकी सहयोग और रक्षा निर्माण क्षमता दोनों में बड़ा विस्तार देखने को मिल सकता है।

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