
G20 समिट में भारत की मजबूत उपस्थिति… PM Modi पहुंचे जोहान्सबर्ग, मिला रेड-कार्पेट स्वागत
G20 Summit: दुनिया इस समय भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता, कर्ज संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे दौर में वैश्विक नेतृत्व का सबसे प्रभावशाली मंच—G20 Summit—अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं और समाधान खोजने का केंद्र बना हुआ है। इसी सम्मेलन में भाग लेने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग पहुंचे, जहां उनका शानदार स्वागत किया गया। यह समिट इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार कोई अफ्रीकी देश G20 की मेजबानी कर रहा है।
पीएम मोदी को मिला रेड कार्पेट वेलकम
प्रधानमंत्री मोदी जोहान्सबर्ग के वाटरक्लूफ एयर फोर्स बेस पहुंचे, जहां दक्षिण अफ्रीकी एयरफोर्स ने उन्हें रेड-कार्पेट सम्मान दिया। पीएम मोदी ने कहा कि वे विश्व नेताओं के साथ “उपयोगी चर्चाओं” के लिए उत्सुक हैं और वैश्विक चुनौतियों पर भारत की रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
दक्षिण अफ्रीका ने 1 दिसंबर 2024 से G20 की अध्यक्षता संभाली है, और इस बार का सम्मेलन अफ्रीकी राष्ट्रों की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को भी मजबूती देता है।
क्या है G20 Summit?
दरअसल, G20 दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का एक मंच है, जिसे वैश्विक आर्थिक मसलों, चुनौतियों और संभावित समाधानों पर चर्चा के लिए बनाया गया है. यह दुनिया की 85% GDP, 75% वैश्विक व्यापार और दो-तिहाई जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करता है. इसमें 19 देश और दो रीजनल बॉडीज हैं और अभी इसके मेंबर हैं: अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, इंडिया, इंडोनेशिया, इटली, जापान, साउथ कोरिया, मैक्सिको, रूस, सऊदी अरब, साउथ अफ्रीका, टर्की, यूनाइटेड किंगडम और यूनाइटेड स्टेट्स, साथ ही अफ्रीकन यूनियन और यूरोपियन यूनियन.
बता दें साल 1999 में एशियाई आर्थिक संकट के बाद शुरू हुआ यह मंच पहले सिर्फ फाइनेंस मिनिस्टर और सेंट्रल बैंक गवर्नरों का ग्रुप था. लेकिन 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस के दौरान इसकी भूमिका बढ़ी और पहली बार राष्ट्र प्रमुखों की बैठक हुई. तब से यह हर साल होने वाला लीडर्स समिट बन गया.
G20 की शुरुआत कैसे हुई?
1999 में एशियाई आर्थिक संकट के बाद इसे फाइनेंस मंत्रियों और सेंट्रल बैंक गवर्नरों के मंच के रूप में बनाया गया था।
2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के बाद पहली बार राष्ट्र प्रमुखों की बैठक हुई और तब से यह वार्षिक शिखर सम्मेलन बन गया।
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G20 में किन मुद्दों पर होती है चर्चा?
समिट का एजेंडा सदस्य देशों के शेरपा तय करते हैं। प्रमुख विषय इस प्रकार हैं:
- वैश्विक अर्थव्यवस्था व विकास
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्त
- डिजिटल टेक्नोलॉजी व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
- विकासशील देशों के लिए कर्ज संकट समाधान
- जलवायु परिवर्तन व स्वच्छ ऊर्जा
- भ्रष्टाचार-रोधी उपाय
- रोजगार और कौशल विकास
ये मुद्दे दुनिया की भविष्य दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
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G20 क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
G7 सिर्फ अमीर देशों का समूह है, जबकि G20 असल वैश्विक अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है।
यहां विकसित और विकासशील – दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाएं हैं, इसलिए यहां लिए गए फैसलों का असर दुनिया के हर हिस्से पर पड़ता है।
उदाहरण:
- 2009 में G20 ने 1 ट्रिलियन डॉलर का राहत पैकेज जारी कर वैश्विक अर्थव्यवस्था को संभाला था।
हालांकि, विभिन्न देशों के हित अलग होने के कारण सहमति बनाना हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन फिर भी G20 दुनिया का सबसे प्रभावी आर्थिक मंच माना जाता है।
जोहान्सबर्ग में हो रहा G20 Summit न सिर्फ आर्थिक मुद्दों पर चर्चा का स्थल है, बल्कि बदलती भू-राजनीति, जलवायु संकट और तकनीकी क्रांति के बीच वैश्विक नेतृत्व की नई दिशा भी तय करेगा।
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