
भारत-भूटान संबंधों में नई ऊर्जा का संचार… द्विपक्षीय सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों पर जोर
PM Modi Bhutan Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी दो दिवसीय भूटान यात्रा के अंतिम दिन बुधवार को भूटान के चतुर्थ नरेश जिग्मे सिंगे वांगचुक से मुलाकात करेंगे और उनके सम्मान में आयोजित एक विशेष समारोह में भाग लेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी नई दिल्ली लौटेंगे। यह यात्रा भारत की ‘पड़ोसी प्रथम नीति’ के तहत द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
ऊर्जा सहयोग को मिला नया आयाम
इससे एक दिन पहले मंगलवार को प्रधानमंत्री मोदी और भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर व्यापक चर्चा की। दोनों देशों के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद, प्रधानमंत्री मोदी और भूटान नरेश ने संयुक्त रूप से 1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का उद्घाटन किया। यह परियोजना भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग का एक अहम प्रतीक है, जो दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी को और गहरा बनाएगी।
PM Modi ने दिया ये सन्देश
“भूटान के राजा महामहिम जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक के साथ बहुत उपयोगी बातचीत हुई। हमने भारत-भूटान संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की। ऊर्जा, क्षमता निर्माण, संपर्क, प्रौद्योगिकी, रक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। भारत को भूटान की विकास यात्रा में एक प्रमुख भागीदार होने पर गर्व है।”
Had the honour of inaugurating Kālacakra ‘Wheel of Time’ Empowerment with His Majesty Jigme Khesar Namgyel Wangchuck, the King of Bhutan and His Majesty The Fourth Druk Gyalpo. It was presided over by His Holiness the Je Khenpo which made it even more special. This is an… pic.twitter.com/H4ZOFvOkZn
— Narendra Modi (@narendramodi) November 12, 2025
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सांस्कृतिक और आध्यात्मिक रिश्तों की झलक
भारत और भूटान के बीच न केवल रणनीतिक बल्कि गहरे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंध भी हैं। इस भावना को दर्शाते हुए प्रधानमंत्री मोदी मंगलवार को थिम्पू के ताशिछोद्ज़ोंग में भूटान नरेश के साथ भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों से आशीर्वाद लेने पहुंचे।
ये अवशेष चौथे राजा की 70वीं जयंती और भूटान की शाही सरकार द्वारा आयोजित वैश्विक शांति प्रार्थना महोत्सव के उपलक्ष्य में भारत से भेजे गए थे। ग्रैंड कुएनरे हॉल में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने मिलकर वैश्विक शांति और मानवीय मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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चौथे राजा के सम्मान में विशेष समारोह
प्रधानमंत्री मोदी ने भूटान के चतुर्थ नरेश जिग्मे सिंगे वांगचुक की 70वीं जयंती के अवसर पर आयोजित समारोह में भी भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने भारत और भूटान के बीच “स्थायी मित्रता, आपसी विश्वास और साझा आध्यात्मिक विरासत” को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता जताई।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत-भूटान संबंधों को नई दिशा देने वाली साबित हुई है। ऊर्जा, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और सुरक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में उठाए गए कदम भविष्य में दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित होंगे।
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