
Iran-Israel संघर्ष 12वें दिन भी जारी…140 अमेरिकी सैनिक घायल, Qatar ने झाड़ा पल्ला
West Asia Crisis: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष लगातार और भयावह होता जा रहा है। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बीच Iran और Israel के बीच हमले और जवाबी हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद ईरान ने भी जोरदार पलटवार किया है। मिसाइलों और ड्रोन हमलों की लगातार आवाज के बीच यह संघर्ष अब 12वें दिन में प्रवेश कर चुका है और पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल बन गया है।
ताजा जानकारी के अनुसार ईरानी हमलों में करीब 140 अमेरिकी सैनिक घायल हो गए हैं। यह हमले ऐसे समय में हुए हैं जब क्षेत्र में पहले से ही अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा बढ़ाई गई थी। इसके बावजूद ईरान समर्थित हमलों ने अमेरिकी सेना को बड़ा नुकसान पहुंचाया है।
कतर ने मध्यस्थता से किया इनकार
इस बढ़ते संघर्ष के बीच Qatar ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात में वह मध्यस्थ की भूमिका निभाने की स्थिति में नहीं है। कतर के अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में हालात इतने तनावपूर्ण हैं कि किसी भी तरह की बातचीत शुरू कराना फिलहाल बेहद मुश्किल है।
कतर पहले भी कई क्षेत्रीय विवादों में मध्यस्थ की भूमिका निभा चुका है, लेकिन इस बार उसने साफ संकेत दिए हैं कि स्थिति सामान्य होने तक किसी भी तरह की मध्यस्थता संभव नहीं है।
Trump का सख्त रुख
इस पूरे संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का रुख भी काफी सख्त नजर आ रहा है। ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिकी ठिकानों या सैनिकों पर हमले जारी रहे तो अमेरिका और भी कड़ा सैन्य कदम उठा सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका के इस रुख से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ सकता है। खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही कई देशों की सैन्य गतिविधियां तेज हो चुकी हैं।
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भारत की पैनी नजर
बढ़ते संघर्ष को लेकर भारत भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पश्चिम एशिया में तेजी से बदलती परिस्थितियों की सरकार लगातार समीक्षा कर रही है।
सरकार ने क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी है। जरूरत पड़ने पर भारतीयों को सुरक्षित निकालने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।
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वैश्विक राजनीति के लिए बड़ा संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा। तेल आपूर्ति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका बड़ा प्रभाव पड़ सकता है।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में हालात शांत होते हैं या यह संघर्ष और बड़े युद्ध का रूप ले लेता
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