
भारत के जहाजों को सुरक्षित रास्ता देगा ईरान… लेकिन बदले में क्या चाहता है तेहरान?
India UAE Saudi Vs Iran BRICS: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ऊर्जा संकट के बीच ईरान ने भारत को बड़ी राहत देने का संकेत दिया है। ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देगा। यह वही समुद्री मार्ग है जहां से दुनिया के करीब एक-तिहाई तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है।
भारतीय जहाजों का रास्ता साफ़
नई दिल्ली में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने कहा कि भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक दोस्ताना रिश्ते हैं और दोनों देशों के क्षेत्रीय हित भी काफी हद तक समान हैं। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा हालात के बावजूद भारतीय जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखा जाएगा।
इसी बीच खबर सामने आई कि ईरान ने भारत के एलपीजी से लदे दो टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति भी दे दी है, जिससे भारत में गैस आपूर्ति को लेकर चल रही चिंताओं को कुछ राहत मिली है।
होर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला दुनिया का सबसे रणनीतिक समुद्री मार्ग माना जाता है।
- दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है
- भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आने वाले तेल-गैस पर निर्भर करता है
इस वजह से इस इलाके में किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
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बदले में ईरान की क्या मांग?
विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि ईरान भारत से कई रणनीतिक सहयोग की उम्मीद कर रहा है, जैसे—
- भारत का कूटनीतिक समर्थन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर
- ईरान के साथ ऊर्जा और व्यापार सहयोग को जारी रखना
- चाबहार पोर्ट परियोजना जैसे प्रोजेक्ट्स में तेज़ी
चाबहार पोर्ट को भारत, मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंच के लिए बेहद अहम मानता है। ईरान चाहता है कि भारत इस परियोजना और व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करे।
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भारत के लिए क्या मायने?
विशेषज्ञों के अनुसार यह घटनाक्रम भारत-ईरान रिश्तों की मजबूती को दिखाता है। अगर होर्मुज मार्ग सुरक्षित रहता है तो भारत की तेल और गैस सप्लाई पर बड़ा संकट टल सकता है, जो मौजूदा वैश्विक तनाव के बीच बहुत महत्वपूर्ण है।
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