केमिकल वेपंस से अपने ही लोगों को मौत की नींद सुला रहा पाकिस्तान? बलूचों के दावे से मचा हड़कंप

Islamabad News: पाकिस्तान के खिलाफ बलूचिस्तान से एक गंभीर और सनसनीखेज आरोप सामने आया है। कई बलूच एक्टिविस्टों ने दावा किया है कि पाकिस्तान अपनी ही आबादी पर केमिकल वेपंस का इस्तेमाल कर रहा है। हाल के दिनों में बलूचिस्तान के कई इलाकों में ड्रोन हमलों और हवाई कार्रवाई की रिपोर्टें सामने आई हैं, जिनके आधार पर यह आरोप और तेज हो गया है।

व्हाइट हाउस को टैग कर की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग
बलूच एक्टिविस्ट मीर यार बलूच ने सोशल मीडिया के जरिए व्हाइट हाउस को टैग करते हुए अपील की है कि अंतरराष्ट्रीय हथियार विशेषज्ञों और संगठनों को तुरंत बलूचिस्तान भेजा जाए ताकि कथित केमिकल अटैक की जांच हो सके। मीर यार के अनुसार, “हमें कई जगहों पर ड्रोन हमलों की पक्की रिपोर्ट मिली है। स्थानीय लोगों ने बताया है कि पाकिस्तान एयरफोर्स रोज़ाना लगभग 50 इलाकों में निगरानी कर रही है और कुछ जगहों पर आम बस्तियों पर हवाई हमले भी किए गए हैं।”

उन्होंने कहा कि हमले के बाद चट्टानों और मलबे पर “अजीब केमिकल कण” पाए गए, जो सामान्य विस्फोटों में नहीं दिखाई देते।
किन क्षेत्रों में कार्रवाई की रिपोर्ट?

एक्टिविस्टों के मुताबिक, जिन इलाकों में निगरानी या हमलों की बात कही जा रही है, उनमें शामिल हैं:

  • कलात
  • खुजदार
  • मंगचर
  • बोलन
  • कोहलू
  • कहान
  • चगाई
  • पंजगुर
  • नोश्की

इनमें से कुछ जगहों पर कथित तौर पर हवाई मिसाइल हमले किए गए, जिनसे आग लगी और घरों को नुकसान पहुंचा।

बलूच विशेषज्ञों का दावा: फास्फोरस और केमिकल वेपंस का इस्तेमाल
बलूच हथियार विशेषज्ञों के अनुसार पाकिस्तान बलूच आबादी के खिलाफ केमिकल और फॉस्फोरस हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत पूरी तरह प्रतिबंधित है। यदि आरोप साबित होते हैं तो पाकिस्तान के खिलाफ इंटरनेशनल कोर्ट में युद्ध अपराध का मामला दर्ज हो सकता है।

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2005 का संदर्भ, मुशर्रफ पर भी आरोप
मीर यार बलूच ने 2005 की घटनाओं की भी याद दिलाई, जब तत्कालीन सैन्य शासक जनरल परवेज़ मुशर्रफ पर बलूचिस्तान के कोहलू, काहन और अन्य क्षेत्रों में फॉस्फोरस सहित प्रतिबंधित हथियारों के इस्तेमाल का आरोप लगा था। उस समय की रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया था कि इन हमलों में इस्तेमाल हथियार अमेरिका निर्मित थे।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चुप्पी ने हालात को और बिगाड़ा है। “बलूचिस्तान में मानवाधिकार का उल्लंघन जारी है, और इसे बलूच समुदाय के नरसंहार के रूप में देखा जाना चाहिए।”

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अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रियाओं पर निगाहें
फिलहाल पाकिस्तान की ओर से इन आरोपों पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बलूच कार्यकर्ताओं की अपील के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं का क्या रुख रहेगा, इस पर सभी की नजरें लगी हैं।

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