ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट और स्टोन इंडस्ट्री में लौटी रौनक… US के टैरिफ फैसले से निर्यातकों में उत्साह

Rajasthan News: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौते (ट्रेड डील) ने भारतीय निर्यात उद्योग में सकारात्मक बदलाव की उम्मीदें जगाई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से आयात होने वाले वस्तुओं पर लागू टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है, जिससे ज्वेलरी, हैंडीक्राफ्ट, गारमेंट, टेक्सटाइल और प्राकृतिक स्टोन जैसे श्रम-गहन उद्योगों को राहत मिली है।

टैरिफ में कटौती से निर्यात में नई गति
टैरिफ में भारी कटौती का निर्णय दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को कम करने और निर्यात को पुनर्जीवित करने के लक्ष्य के तहत लिया गया है। इस समझौते के अनुसार, अमेरिका ने पिछले साल लगाए गए उच्च टैरिफ को वापस लिया और अब भारतीय उत्पादों पर आधिकारिक शुल्क केवल 18% रहेगा, जिसका सकारात्मक असर उद्योगों पर दिखने लगा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह कटौती खासकर उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जहाँ अमेरिका भारत का सबसे बड़ा बाजार है — जैसे जवाहरात और कीमती पत्थर (जेम्स & ज्वेलरी) का लगभग 30% निर्यात इसी बाज़ार में होता है।

ज्वेलरी और पत्थर उद्योग को बड़ी राहत
गहनों और कीमती पत्थरों के निर्यात संघों की रिपोर्ट में बताया गया है कि रूस से कच्चे माल की खरीद और सख्त अमेरिकी शुल्क के चलते पिछले साल से इस सेक्टर की निर्यात़ क्षमता चुनौती में थी। टैरिफ के 50% होने के कारण भारतीय निर्यातकों को मुनाफ़ा घटाना पड़ा, ऑर्डर रुके और बाजार हिस्सेदारी ग़ायब हुई। अब 18% टैरिफ के साथ मंडी में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त वापस आ रही है, जिससे मांग में धार आने लगी है।

राजस्थान हथकरघा, पत्थर और हस्तशिल्प क्षेत्रों के प्रतिनिधियों का कहना है कि अब अमेरिकी बायर्स फिर से ऑर्डर की पुष्टि कर रहे हैं और कई इकाइयों में उत्पादन बढ़ने लगा है। इससे रोजगार में सुधार के साथ साथ निर्यात की मात्रा भी अगले कुछ महीनों में बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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गर्मी में गारमेंट और टेक्सटाइल को फायदा
टैरिफ कटौती से गर्मियों और पैक्ड तैयार परिधान (गारमेंट) उद्योग विशेष रूप से आकर्षित हुए हैं। पानीपत और तमिलनाडु जैसे प्रमुख टेक्सटाइल हबों में उद्यमियों ने कहा कि अमेरिका में सामान की प्रतिस्पर्धात्मक कीमत के कारण अब दोबारा निर्यातिक ऑर्डर मिलने लगे हैं और अगले वित्त वर्ष में डबल-डिज़िट वृद्धि की उम्मीद है।

छोटे और मध्यम निर्यातकों ने भी कहा है कि अब वे अमेरिकी ग्राहकों के साथ पुराना विश्वास कायम कर रहे हैं और न केवल बुनियादी ऑर्डर लौट रहे हैं बल्कि नए अनुबंध भी संवित हैं।

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सरकारी और वित्तीय असर
केंद्रीय व्यापार मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि यह समझौता सिर्फ़ टैरिफ राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और अमेरिका के बीच बहुपक्षीय व्यापार सहयोग को मजबूत करेगा। समझौते के एक भाग के रूप में भारत ने भी कुछ अमेरिकी कृषि और ऊर्जा उत्पादों की खपत बढ़ाने पर सहमति जताई है।

निवेशकों और बाजार में भी सकारात्मक रुख देखा गया है — भारतीय शेयर बाजार में निर्यात संबंधित कंपनियों के शेयर में तेजी आई है और रुपया भी मजबूती दिखा है, जो आर्थिक गतिविधियों में विश्वास बढ़ने का संकेत है।

क्या कहते हैं जानकार?
हालांकि टैरिफ में कटौती निर्यातकों के लिये राहत का बड़ा कदम है, विश्लेषकों का कहना है कि बाजार हिस्सेदारी और मांग पूरी तरह बहाल होने में समय लग सकता है। कामकाजी पूंजी, उत्पादन क्षमता और वैश्विक मांग में निखार के लिए निर्यातकों को अपने निर्यात नेटवर्क को भी मजबूत करना होगा।

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