
जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें CJI के रूप में ली शपथ, 6 देशों के न्यायाधीश रहे उपस्थित
CJI Oath: भारत की न्यायपालिका के लिए सोमवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित गरिमामय समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। जस्टिस सूर्यकांत ने यह शपथ हिंदी में लेकर एक विशेष संदेश भी दिया, जिसे समारोह में मौजूद लोगों ने सराहा।
पूर्व CJI गवई को गले लगाते हुए भावनात्मक क्षण
शपथ लेने के तुरंत बाद जस्टिस सूर्यकांत ने अपने पूर्ववर्ती मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई को गले लगाकर उनका अभिवादन किया। यह दृश्य समारोह का सबसे भावुक क्षण बन गया, जिसने उनकी विनम्रता और न्यायपालिका के भीतर मौजूद सौहार्द को उजागर किया।
छह देशों का विदेशी न्यायिक प्रतिनिधिमंडल पहली बार शामिल
इस वर्ष का शपथ ग्रहण कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। पहली बार किसी भारतीय CJI के शपथ समारोह में छह देशों—
भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका—के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट जज शामिल हुए।
विदेशी प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी ने भारत की न्यायिक प्रतिष्ठा और न्यायिक कूटनीति को नए स्तर पर स्थापित किया।
कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?
हरियाणा के हिसार जिले में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत का सफर एक साधारण पृष्ठभूमि से उठकर देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचने का उदाहरण है।
- उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से कानून में स्नातकोत्तर (LLM) किया।
- वकालत से अपने करियर की शुरुआत करते हुए वे 2004 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के जज बने।
- 2018 में उन्हें हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया।
- इसके बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहाँ उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में निर्णायक भूमिका निभाई।
महत्वपूर्ण फैसलों में निभाई भूमिका
जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में अपने कार्यकाल के दौरान अनेक ऐतिहासिक मामलों में हिस्सा लिया, जिनमें शामिल हैं—
- अनुच्छेद 370 हटाने से जुड़े मामले
- पेगासस स्पाइवेयर जांच
- राजद्रोह कानून (IPC की धारा 124A) पर रोक लगाने का आदेश
- बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण का निर्देश
उनके निर्णय अक्सर मानवाधिकारों, न्यायिक सुधारों और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा से जुड़े रहे हैं।
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9 फरवरी 2027 तक रहेगा कार्यकाल
जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 15 महीनों का होगा और वे 9 फरवरी 2027 को सेवानिवृत्त होंगे। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह अवधि भले कम हो, लेकिन उनके अनुभव और स्पष्ट न्यायिक दृष्टिकोण के चलते वे कई महत्वपूर्ण सुधारों और दिशानिर्देशों पर काम कर सकते हैं।
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न्यायपालिका के लिए महत्वपूर्ण समय
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की बड़ी संख्या, तकनीकी सुधार, न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी जैसे मुद्दों को देखते हुए जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनकी नियुक्ति से न्यायपालिका में एक नई ऊर्जा और दिशा आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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