कलयुगी मां ने नवजात को जन्म के तुरंत बाद फेंका, आवारा कुत्तों ने बचाई जान

Pashchim Bangal News: पश्चिम बंगाल के नवाद्वीप से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत और जानवरों की संवेदनशीलता की मिसाल पेश की है। एक मां ने अपने नवजात बच्चे को फेंक दिया, लेकिन बच्चा सात-आठ आवारा कुत्तों के घेरे में सुरक्षित रहा। कुत्तों ने न भौंका, न हिलाया — बस चुपचाप बच्चे की रक्षा करते रहे, मानो यह जान उनके हाथ में हो।

कुत्तों की सतर्कता ने बचाई जान
सुबह करीब पाँच बजे, गांव की रहने वाली राधा भौमिक शौचालय जा रही थीं। रास्ते में कुत्तों को देखकर पहले तो डर गईं, लेकिन जब पास जाकर देखा, तो जमीन खिसक गई। कुत्तों ने बच्चे को घेर रखा था और उन्हें देखकर रास्ता छोड़ दिया। राधा ने तुरंत बच्चे को गोद में उठाया और चीख पड़ी।

राधा ने मीडिया को बताया…

“जिन कुत्तों को हम रोज भगाते हैं और पत्थर मारते हैं, उन्होंने वो कर दिखाया जो इंसान नहीं कर पाते। उन्होंने इस छोटी-सी जान की रक्षा की।”

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बच्चे की सुरक्षित स्थिति
राधा की भतीजी-बहू प्रीति भौमिक तुरंत मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बच्चे को गोद में लेकर पहले माहेशगंज अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच की। इसके बाद बच्चे को कृष्णानगर सदर अस्पताल रेफर किया गया।

डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे को कोई चोट नहीं लगी है। सिर पर जो खून लगा था, वह जन्म के कारण था। वर्तमान में बच्चा पूरी तरह सुरक्षित है।

पुलिस और चाइल्डलाइन की कार्रवाई
पुलिस और चाइल्डलाइन की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। बच्चे को फिलहाल चाइल्ड वेलफेयर कमिटी के पास भेजा गया है ताकि उसका पालन-पोषण सुनिश्चित किया जा सके।

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आस-पास के लोगों की प्रतिक्रिया
घटना के बारे में कॉलोनी के लोगों का कहना है कि कुत्तों ने इंसानियत की मिसाल पेश की। उन्होंने बताया कि रोज उन्हें गंदा कहकर भगाया जाता है, लेकिन जब इंसान ने बच्चा छोड़ दिया, तब इन्हीं कुत्तों ने उसकी रक्षा की।

एक वृद्ध महिला ने कहा…

“भगवान अलग-अलग रूप में आते हैं, आज कुत्तों के रूप में आए हैं।”

यह घटना न केवल मानव संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि जानवर भी सहानुभूति और सुरक्षा का परिचायक हो सकते हैं। नवजात बच्चे की जान बचने के पीछे इन आवारा कुत्तों की सतर्कता को स्थानीय लोग आज तक हीरो मान रहे हैं।

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