Lifestyle बीमारियां और मानसिक तनाव बन रहे हैं ‘साइलेंट किलर’, WHO ने दी चेतावनी

Health Updates: आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में लोग न खाने-पीने का ध्यान रखते हैं, न पर्याप्त नींद और न ही अपनों के साथ समय बिताने की फुर्सत। लगातार बढ़ते काम का दबाव, सोशल मीडिया की भाग-दौड़ और रिश्तों की उलझनें मिलकर लोगों के जीवन में ऐसी गैर-संचारी बीमारियां (NCDs) ला रही हैं, जो भीतर ही भीतर शरीर को खोखला कर देती हैं।

एनसीडी में कौन-कौन से रोग शामिल हैं?
एनसीडी यानी Non-Communicable Diseases में प्रमुख हैं:

  • हृदय रोग
  • हाई ब्लड प्रेशर
  • डायबिटीज
  • कैंसर
  • मानसिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताजा रिपोर्ट बताती है कि ये बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं और गरीब एवं मिडिल क्लास देशों में सबसे ज्यादा कहर ढा रही हैं।

क्या कहता है रिपोर्ट?
WHO की रिपोर्ट ‘Saving Lives, Spending Less’ के अनुसार, एनसीडी से लड़ने के लिए भारी-भरकम बजट की जरूरत नहीं। यदि हर देश प्रति व्यक्ति सिर्फ 3 डॉलर (लगभग 250 रुपए) प्रति वर्ष इस दिशा में खर्च करे, तो 2030 तक लगभग 12 मिलियन (1.2 करोड़) लोगों की जान बचाई जा सकती है।

कारण और प्रभाव
रिपोर्ट में बताया गया है कि इन बीमारियों का मुख्य कारण गलत लाइफस्टाइल है:

  • ज्यादा जंक फूड का सेवन
  • पर्याप्त व्यायाम या कसरत का अभाव
  • नींद की कमी
  • लगातार तनाव और मानसिक दबाव

इसके अलावा, कंपनियों का प्रचार और विज्ञापन नीति निर्माताओं पर प्रभाव डालता है, जिससे जरूरी कानून पास नहीं हो पाते।

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WHO की सलाह
डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस, महानिदेशक WHO, ने कहा कि गैर-संचारी रोग और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं साइलेंट किलर हैं। ये हमारे जीवन और नवाचार को प्रभावित कर रही हैं। हमें इनके खिलाफ समय रहते कदम उठाने होंगे। रिपोर्ट में उन देशों के उदाहरण दिए गए हैं, जिन्होंने इस दिशा में सफलता पाई है, जैसे:

  • डेनमार्क
  • दक्षिण कोरिया
  • मोल्दोवा

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बचाव और उपाय
एनसीडी को रोकने के लिए WHO ने सरकारों और नीति निर्माताओं को कुछ उपाय सुझाए हैं:

  1. तंबाकू पर टैक्स बढ़ाना

2. बच्चों को जंक फूड के विज्ञापन से बचाना

3. शराब की बिक्री और उपभोग पर नियंत्रण

4. मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ और किफायती बनाना

एनसीडी और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों से लड़ना केवल आर्थिक बुद्धिमानी नहीं, बल्कि समृद्ध और स्वस्थ समाज बनाने की आवश्यकता है। थोड़े समझदारी और सही निवेश से लाखों जीवन बचाए जा सकते हैं और समाज की सेहत में सुधार लाया जा सकता है।

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