लखनऊ में शिया धर्मगुरुओं का बड़ा ऐलान, हुसैनाबाद ट्रस्ट के खिलाफ आंदोलन की धमकी

UP News: लखनऊ के छोटा इमामबाड़ा में हुसैनाबाद ट्रस्ट से जुड़े मुद्दों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रमुख शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद, मौलाना सैफ अब्बास, मौलाना कल्बे सिब्तैन नूरी समेत बड़ी संख्या में उलेमा, वकील और रॉयल फैमिली के सदस्य मौजूद रहे।

बैठक में हुसैनाबाद ट्रस्ट की कार्यशैली, धार्मिक धरोहरों के संरक्षण और ट्रस्ट की गतिविधियों पर विस्तार से चर्चा हुई।

पार्किंग और ‘लजीज गली’ बना विवाद की वजह

विवाद की मुख्य वजह रूमी दरवाजा के पास हुसैनाबाद ट्रस्ट की जमीन पर बनाई जा रही पार्किंग और सामने विकसित की गई ‘लजीज गली’ है। धर्मगुरुओं का आरोप है कि यह क्षेत्र धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व का है, जहां व्यावसायिक गतिविधियां इमामबाड़ों की पवित्रता और विरासत को प्रभावित कर रही हैं।

“इमामबाड़े इबादत और मातम के लिए बने”

मौलाना कल्बे जव्वाद ने कहा कि अवध के नवाबों ने इमामबाड़ों का निर्माण मजलिस, मातम, जुलूस और नोहाखानी के लिए कराया था, न कि पार्किंग और व्यवसायिक गतिविधियों के लिए। उन्होंने आशंका जताई कि पार्किंग बनने से असामाजिक गतिविधियां बढ़ सकती हैं और धार्मिक स्थलों की गरिमा प्रभावित होगी।

उन्होंने बताया कि हाल ही में उन्होंने निर्माण स्थल का दौरा कर काम रुकवाया था।

जुमे की नमाज के बाद होगा दौरा

बैठक में निर्णय लिया गया कि आने वाले शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद शिया धर्मगुरु और समुदाय के लोग निर्माणाधीन पार्किंग स्थल का दौरा करेंगे। इसके बाद आंदोलन की आगे की रणनीति तय की जाएगी।

अतिक्रमण हटाने की उठी मांग

बैठक में छोटा इमामबाड़ा के सामने हो रहे अतिक्रमण का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक स्थलों के आसपास हो रहे कब्जों के खिलाफ समाज को एकजुट होकर आवाज उठानी होगी। प्रशासन से तत्काल अतिक्रमण हटाने की मांग की गई।

पुराने आंदोलन का दिलाया गया याद

मौलाना कल्बे जव्वाद ने बड़ा इमामबाड़ा गेट विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय महिलाओं ने 50 दिनों तक धरना प्रदर्शन किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन ने हुसैनाबाद ट्रस्ट की निगरानी के लिए कमेटी बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन आज तक उस पर अमल नहीं हुआ।

“लजीज गली” को लेकर प्रशासन पर आरोप

मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि ‘लजीज गली’ के मुद्दे पर प्रशासन को ज्ञापन दिया गया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि कुछ लोगों ने निजी हितों के लिए वहां दुकानों की मांग की थी और ऐसे लोगों को बेनकाब किया जाना चाहिए।

हाईकोर्ट में पहुंचा मामला

धर्मगुरुओं ने बताया कि पार्किंग निर्माण और अन्य विवादों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की जा चुकी है। उन्होंने साफ किया कि कानूनी लड़ाई के साथ-साथ शांतिपूर्ण आंदोलन भी जारी रहेगा, ताकि धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों की मूल पहचान सुरक्षित रह सके।

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