मध्य-पूर्व तनाव से बाजार अलर्ट… वैश्विक तेल बाजार में उछाल की आशंका

Crude Oil Price Surge: मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यदि ईरान की तेल सप्लाई बाधित होती है या होरमुज़ जलडमरूमध्य में आवागमन प्रभावित होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 95 से 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

सप्लाई शॉक का खतरा
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान वैश्विक तेल आपूर्ति में अहम भूमिका निभाता है। यदि क्षेत्र में सैन्य टकराव या प्रतिबंधों के कारण निर्यात बाधित होता है, तो बाजार में सप्लाई शॉक पैदा हो सकता है। होरमुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया की बड़ी मात्रा में कच्चे तेल की ढुलाई होती है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ता है।

‘जियोपॉलिटिकल प्रीमियम’ से बढ़ेगा दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वास्तविक सप्लाई बाधा ही नहीं, बल्कि संभावित जोखिम भी कीमतों में ‘जियोपॉलिटिकल प्रीमियम’ जोड़ देते हैं। यानी तनाव बढ़ने की आशंका भर से ही ट्रेडर्स तेल की कीमतें ऊपर ले जा सकते हैं।

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भारत जैसे आयातक देशों पर असर
भारत जैसे बड़े आयातक देशों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर सीधे पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ता है।

यदि कीमतें 100 डॉलर के पार जाती हैं, तो सरकारों पर टैक्स घटाने या सब्सिडी देने का दबाव भी बढ़ सकता है। इससे राजकोषीय घाटा प्रभावित हो सकता है।

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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
तेल की ऊंची कीमतें वैश्विक महंगाई को बढ़ा सकती हैं और केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति को प्रभावित कर सकती हैं। पहले भी जब तेल 100 डॉलर के आसपास पहुंचा था, तब कई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ा था।

विश्लेषकों का कहना है कि यदि कूटनीतिक समाधान निकलता है और सप्लाई सामान्य रहती है, तो कीमतों में तेजी सीमित रह सकती है। लेकिन हालात बिगड़ने पर 110 डॉलर प्रति बैरल का स्तर भी पार हो सकता है।

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