COVID के बाद पहली बार देशभर में शुरू हुआ मेंटल हेल्थ सर्वे, जानें क्यों है ज़रूरी?

NMHS-2: मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं अक्सर समय पर पहचान में नहीं आ पातीं, जिससे मरीजों की स्थिति धीरे-धीरे गंभीर होती जाती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे-2 (NMHS-2) शुरू किया है। यह सर्वे कोविड-19 महामारी के बाद पहली बार देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करेगा।

इस सर्वे का संचालन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज (NIMHANS), बेंगलुरु द्वारा किया जा रहा है। NMHS-2 में 13 से 17 वर्ष के किशोरों और 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी वयस्कों को शामिल किया जाएगा। पिछला राष्ट्रीय सर्वे वर्ष 2015-16 में हुआ था, जिसमें केवल 12 राज्यों को ही शामिल किया गया था।

पिछले आंकड़ों ने दिखाई थी गंभीर तस्वीर
NMHS 2015-16 के मुताबिक, भारत में 10.6% वयस्क किसी न किसी मानसिक बीमारी से पीड़ित थे, जबकि जीवनकाल में मानसिक बीमारी की संभावना 13.7% तक आंकी गई थी। विभिन्न राष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार, देश की करीब 15% वयस्क आबादी को ऐसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिनके लिए क्लिनिकल इलाज जरूरी है। शहरी क्षेत्रों में यह बोझ 13.5% और ग्रामीण इलाकों में 6.9% दर्ज किया गया था।

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राज्यवार और राष्ट्रीय अनुमान होंगे तैयार
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, NMHS-2 के तहत

  • प्राथमिक मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों के राज्यवार और राष्ट्रीय स्तर पर अनुमान,
  • मानसिक बीमारियों से होने वाली विकलांगता,
  • सामाजिक और आर्थिक बोझ,
  • इलाज के तरीकों और सेवाओं के उपयोग,
  • तथा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों की व्यापक मैपिंग की जाएगी।

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कमजोर वर्गों और जोखिम वाले इलाकों पर फोकस
इस बार सर्वे का दायरा बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों, प्रवासियों और आदिवासी समुदायों तक बढ़ाया गया है। इसके साथ ही जलवायु परिवर्तन, आपदाओं और विस्थापन का मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का भी अध्ययन किया जाएगा।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि NMHS-2 के नतीजों से नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम को मजबूती मिलेगी, संसाधनों के बेहतर वितरण में मदद मिलेगी और खासतौर पर कम सुविधा वाले व उच्च जोखिम वाले इलाकों के लिए भविष्य की नीतियां तय करने में आधार मिलेगा।

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