Michael Waltz बने अमेरिका के नए यूएन राजदूत, सीनेट में कड़ा मुकाबला

US News: अमेरिकी सीनेट ने पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज को संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका का नया राजदूत नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है। यह पद पिछले आठ महीनों से खाली था। अब वाल्ट्ज आगामी सप्ताह न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेंगे, जहां राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को वार्षिक संबोधन देंगे।

सीनेट की पुष्टि प्रक्रिया
सीनेट में हुई वोटिंग में वाल्ट्ज की नियुक्ति पर 47 सांसदों ने पक्ष में और 43 ने विरोध में मतदान किया। दिलचस्प बात यह रही कि तीन डेमोक्रेट सांसद—जॉन फैटरमैन, मार्क केली और जीन शाहीन—ने वाल्ट्ज का समर्थन किया।

दूसरी ओर, रिपब्लिकन सांसद रैंड पॉल अकेले ऐसे सदस्य रहे जिन्होंने उनके खिलाफ वोट दिया। यह नजदीकी परिणाम दिखाता है कि वाल्ट्ज की नियुक्ति को लेकर सीनेट में गहरी विभाजन रेखा मौजूद रही।

पृष्ठभूमि और विवाद
51 वर्षीय वाल्ट्ज ने जनवरी से ट्रंप प्रशासन में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में काम किया था। हालांकि मार्च में एक बड़ी चूक ने उनके करियर को झटका दिया।

  • यमन पर होने वाली संभावित सैन्य कार्रवाई पर चर्चा के दौरान उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बनाई गई निजी सिग्नल चैट में गलती से एक पत्रकार को जोड़ दिया।
  • इस घटना के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा और ट्रंप का उन पर भरोसा कमजोर हो गया।

राजदूत पद की राह

  • पूर्व अमेरिकी राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड ने 20 जनवरी को पद छोड़ा था, जब ट्रंप ने राष्ट्रपति पद संभाला।
  • उसके बाद मार्च में ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसद एलिस स्टेफनिक को इस पद के लिए नामित किया, लेकिन बाद में उनका नामांकन वापस ले लिया।
  • अंततः मई में वाल्ट्ज को इस पद के लिए आधिकारिक तौर पर नामित किया गया और अब सीनेट से पुष्टि मिल गई।

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वाल्ट्ज का दृष्टिकोण
सीनेट की सुनवाई के दौरान वाल्ट्ज ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को सुधार की सख्त जरूरत है। उन्होंने अमेरिकी योगदान की फंडिंग की समीक्षा, पारदर्शिता बढ़ाने और संगठन में यहूदी विरोधी रुख खत्म करने की वकालत की।

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आगे की चुनौतियाँ
यूएन में अमेरिकी राजदूत का पद विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम है। रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व की अस्थिरता और जलवायु संकट जैसे मुद्दों पर अमेरिका की भूमिका निर्णायक मानी जा रही है। अब देखना होगा कि वाल्ट्ज इन चुनौतियों का सामना किस रणनीति के साथ करते हैं और संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की प्राथमिकताओं को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।

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