
Gas Supply Crisis: LPG संकट के बीच सरकार का एक्शन, गैस सप्लाई का नियम लागू
LPG, Oil, Gas Supply Crisis/Price: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सरकार ने प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 लागू कर गैस सप्लाई को प्राथमिक क्षेत्रों के लिए सुरक्षित करने का फैसला किया है।
LPG, Oil, Gas Supply Crisis/Price: मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच दुनियाभर में इसका असर नजर आने लगा है। भारत में एलपीजी सिलेंडर के संकट की खबरें सामने आई हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने अहम फैसला लिया है। देशभर में ESMA (आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम) लागू किया गया है। सरकार ने घरेलू खाना पकाने की गैस (एलपीजी) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Services Maintenance Act) लागू किया है।
इसमें रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल यूनिट्स को एलपीजी का उत्पादन अधिकतम करने और प्रमुख हाइड्रोकार्बन स्रोतों को एलपीजी पूल में भेजने का निर्देश दिया है।
‘सिर्फ घरेलू कंज्यूमर्स को ही…’
ऑर्डर में कहा गया है कि LPG एक ज़रूरी घरेलू फ्यूल है, जिसका इस्तेमाल पूरे भारत में घरों में बड़े पैमाने पर होता है और इसकी बिना रुकावट अवेलेबिलिटी पक्का करना पब्लिक इंटरेस्ट में ज़रूरी है.
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे यह पक्का करें कि इस अरेंजमेंट के तहत सोर्स की गई LPG सिर्फ़ घरेलू कंज्यूमर्स को ही सप्लाई की जाए.
मिनिस्ट्री ने कहा कि यह नया निर्देश 5 मार्च को जारी पहले के ऑर्डर की जगह लेगा और अगले ऑर्डर तक लागू रहेगा.
ECA क्या है?
एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट, 1955 (ECA) सरकार का सालों से बढ़ती खाने की चीज़ों की कीमतों को कम करने, जमाखोरी रोकने और फ़ूड सिक्योरिटी बनाए रखने का एक तरीका रहा है.
साल 2020 में, संसद ने एक्ट में बदलाव किया, जिससे अनाज, दालें, आलू, प्याज, खाने के तिलहन और तेल को रेगुलेट करने की केंद्र की शक्तियों को सिर्फ़ युद्ध, अकाल, बहुत ज़्यादा कीमतों में बढ़ोतरी और गंभीर प्राकृतिक आपदा जैसी खास परिस्थितियों में ही सीमित किया जा सके. इसमें यह भी तय किया गया कि किसी भी खेती की उपज की स्टॉक लिमिट को सिर्फ़ बागवानी की उपज की रिटेल कीमत में 100% की बढ़ोतरी या खराब न होने वाली खेती की खाने की चीज़ों की रिटेल कीमत में 50% की बढ़ोतरी होने पर ही रेगुलेट किया जाएगा.
पेट्रोल-डीजल को लेकर ये बोले अधिकारी
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की दरें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने के बावजूद फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं की जाएगी। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी तेल विपणन कंपनियां फिलहाल मौजूदा लागत दबाव को वहन करेंगी। सरकार वैश्विक तेल बाजारों पर कड़ी नजर रख रही है, लेकिन फिलहाल खुदरा ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की कोई योजना नहीं है।





