अमेरिका की नीयत पर भरोसा नहीं… यूरेनियम इनरिचमेंट पर ईरान का दो टूक

Iran Nuclear Policy Unchanged: ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के दबाव और धमकियों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान किसी भी सूरत में अपना यूरेनियम संवर्धन (यूरेनियम इनरिचमेंट) कार्यक्रम बंद नहीं करेगा, चाहे उसे सैन्य धमकियां दी जाएं या नए आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाएं। उन्होंने कहा कि ईरान को डराकर उसकी परमाणु नीति में बदलाव नहीं कराया जा सकता और अमेरिका की मंशा पर उसे कोई भरोसा नहीं है।

सार्वजनिक मंच से अमेरिका को कड़ा जवाब
रविवार को तेहरान में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री अराघची ने कहा,
“ईरान कोई ऐसा देश नहीं है, जिसे धमकियों से झुकाया जा सके। हमारी परमाणु नीति हमारे राष्ट्रीय हितों और संप्रभु अधिकारों पर आधारित है। अमेरिका की नीयत पर हमें भरोसा नहीं है।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और यह देश के विकास और ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा हुआ है।

ओमान वार्ता के बीच सख्त रुख
ईरान का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब कई सालों के तनाव के बाद ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में अप्रत्यक्ष बातचीत दोबारा शुरू हुई है। इन वार्ताओं का मकसद परमाणु समझौते को लेकर जमी बर्फ को पिघलाना बताया जा रहा है।
ईरान चाहता है कि उस पर लगाए गए कड़े आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं, जिनकी वजह से उसकी अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। वहीं अमेरिका की मांग है कि ईरान अपने यूरेनियम इनरिचमेंट कार्यक्रम पर सख्त रोक लगाए और अंतरराष्ट्रीय निगरानी को स्वीकार करे।

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प्रतिबंध बनाम परमाणु कार्यक्रम
ईरानी नेतृत्व का कहना है कि अमेरिका ने पहले भी समझौतों का सम्मान नहीं किया। 2018 में अमेरिका द्वारा एकतरफा तौर पर परमाणु समझौते (JCPOA) से बाहर निकलने का जिक्र करते हुए ईरान बार-बार यह दोहराता रहा है कि अब वह केवल ठोस गारंटी के साथ ही किसी समझौते पर आगे बढ़ेगा।
अराघची ने संकेत दिए कि जब तक ईरान के खिलाफ प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हटते, तब तक परमाणु कार्यक्रम में किसी तरह की रियायत की उम्मीद करना बेकार है।

अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ी हलचल
ईरान के इस कड़े रुख से पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पहले से ही चिंतित हैं, जबकि ईरान इसे अपना वैध और संप्रभु अधिकार बता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान में चल रही बातचीत के बीच इस तरह के तीखे बयान दोनों पक्षों की सख्त सौदेबाजी की रणनीति का हिस्सा भी हो सकते हैं।

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नई ऊंचाई पर अमेरिका-ईरान तनाव
फिलहाल यह साफ है कि ईरान बिना प्रतिबंध हटवाए अपने यूरेनियम इनरिचमेंट कार्यक्रम पर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कूटनीतिक बातचीत किसी समाधान तक पहुंचती है या फिर अमेरिका-ईरान तनाव एक बार फिर नई ऊंचाई पर पहुंच जाता है।

कुल मिलाकर, ईरान के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि वह दबाव की राजनीति के आगे झुकने वाला नहीं है और परमाणु मुद्दे पर उसका रुख पहले से कहीं ज्यादा सख्त होता जा रहा है।

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