1971 में भारत के साथ खड़ा रहने वाला ओमान फिर फोकस में, PM मोदी करेंगे दो दिवसीय दौरा

PM Modi Jordan Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 दिसंबर से जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान की चार दिवसीय यात्रा पर रवाना होंगे। यह दौरा न सिर्फ व्यापार और रक्षा बल्कि भारत की पश्चिम एशिया रणनीति को भी नई मजबूती देगा। इस यात्रा का सबसे अहम पड़ाव ओमान है—वो छोटा सा अरब देश जिसकी आबादी भले ही सिर्फ 50 लाख के करीब है, लेकिन भारत के लिए उसकी दोस्ती बहुत बड़ी, पुरानी और भरोसेमंद रही है।

ओमान वह एकमात्र अरब देश था जिसने 1971 के भारत-पाक युद्ध में खुलकर भारत का समर्थन किया था। तब से यह रिश्ता हर गुजरते साल के साथ और मज़बूत हुआ है। पीएम मोदी की 17–18 दिसंबर की तय ओमान यात्रा इस रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

यात्रा का शेड्यूल

  • 15–16 दिसंबर: पीएम मोदी जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के निमंत्रण पर जॉर्डन का दौरा करेंगे।
  • 16–17 दिसंबर: इसके बाद वे इथियोपिया में दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे।
  • 17–18 दिसंबर: यात्रा का तीसरा और अंतिम चरण ओमान होगा, जहां वे सुल्तान हैथम बिन तारिक अल सैद के निमंत्रण पर जाएंगे।

ओमान: अरब दुनिया का सबसे पुराना स्वतंत्र देश
ओमान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। यह अरब प्रायद्वीप के दक्षिण-पूर्व कोने पर और खाड़ी के प्रवेश द्वार पर बसा हुआ है। सदियों पहले यह एक विशाल समुद्री साम्राज्य था।
17वीं शताब्दी में ओमान की सल्तनत पुर्तगाल और ब्रिटेन जैसे औपनिवेशिक साम्राज्यों से हिंद महासागर और फारस की खाड़ी में प्रभाव स्थापित करने की प्रतिस्पर्धा करती थी।

19वीं शताब्दी में ओमान का विस्तार इतना अधिक था कि इसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य से लेकर पाकिस्तान और ईरान तक का हिस्सा और अफ्रीकी तट से जांजीबार तक के इलाके शामिल थे।

जनवरी 2020 में लंबे समय तक ओमान पर शासन करने वाले सुल्तान कबूस के निधन के बाद उनके चचेरे भाई हैथम बिन तारिक अल सैद नए सुल्तान बने। पीएम मोदी की यह यात्रा उन्हीं के आमंत्रण पर हो रही है।

भारत–ओमान दोस्ती: सदियों पुराना रिश्ता
भारत और ओमान के संबंध हजारों वर्षों पुराने व्यापार, नौसेना मार्गों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर आधारित हैं।
1955 में दोनों देशों ने आधिकारिक रूप से राजनयिक संबंध स्थापित किए और 2008 में इन्हें स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक उन्नत किया गया।

आज ओमान भारत की वेस्ट एशिया पॉलिसी का एक प्रमुख स्तंभ है।

1971 का युद्ध: जब ओमान ने दिया था भारत का साथ
1971 के भारत-पाक युद्ध में दुनिया के कई मुस्लिम बहुल देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया था।
लेकिन ओमान—एकमात्र अरब राष्ट्र—था जिसने भारत का खुले रूप से साथ दिया।
यह घटना दोनों देशों के बीच भरोसेमंद संबंध की मजबूत नींव मानी जाती है।

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रक्षा साझेदारी

  • ओमान तीनों भारतीय सेनाओं—थलसेना, नौसेना और वायुसेना—के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करने वाला खाड़ी का पहला देश है।
  • ओमान की रणनीतिक लोकेशन भारत के लिए नौसैनिक सुरक्षा और समुद्री व्यापार मार्गों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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मोदी की यात्रा क्यों अहम?
यह दौरा भारत और ओमान के बीच

  • रक्षा सहयोग,
  • ऊर्जा साझेदारी,
  • समुद्री सुरक्षा,
  • व्यापार,
  • तकनीकी सहयोग

जैसे क्षेत्रों को और गहरा करने पर केंद्रित होगा।

ओमान भारतीयों के लिए भी महत्वपूर्ण है—करीब 7 लाख भारतीय वहां रहते हैं, जो उसकी कुल आबादी का बड़ा हिस्सा हैं और उसकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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