
मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने पर विपक्ष का विरोध तेज, केंद्र सरकार घिरी
Parliament Winter Session: केंद्र सरकार की प्रमुख ग्रामीण रोजगार योजना, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) से महात्मा गांधी का नाम हटाने को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने इसे महात्मा गांधी के सम्मान का उल्लंघन बताते हुए कड़ा विरोध जताया है।
विपक्ष का विरोध और आरोप
- राज्यसभा में विरोध: विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने इसे ‘घोर आपत्तिजनक’ करार दिया और कहा कि यह कदम राष्ट्रीय भावना और ग्रामीण रोजगार की परंपरा को चोट पहुँचाता है।
- इतिहास: वर्ष 2009 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस योजना को महात्मा गांधी के नाम से जोड़कर ग्रामीणों को रोजगार और राष्ट्रपिता के प्रति कृतज्ञता दिखाई।
- केंद्र सरकार पर आरोप: तिवारी ने कहा कि भाजपा लगातार योजनाओं, कार्यालयों और भवनों के नाम बदलने में लगी है। उनका आरोप है कि भाजपा गांधी की विचारधारा के बजाय गोडसे की सोच को बढ़ावा देती रही है।
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महात्मा गांधी का सम्मान
राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने को ‘घोर आपत्तिजनक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने इस योजना को राष्ट्रपिता के नाम से जोड़कर कृतज्ञ राष्ट्र की भावना को व्यक्त किया था।
कांग्रेस सांसद तिवारी ने बताया कि यूपीए सरकार की चेयरपर्सन सोनिया गांधी की पहल पर यह योजना सफलतापूर्वक शुरू हुई थी, जिससे करोड़ों ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिला। तिवारी ने चेतावनी दी कि देशवासी इस कदम को राजनीतिक हताशा में उठाया गया अपमान मानेंगे और इसे कभी माफ नहीं करेंगे।
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राष्ट्रीय मुद्दों से ध्यान भटकाने का आरोप
- तिवारी ने कहा कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय मुद्दों, जैसे पहलगाम आतंकी हमला, से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के कदम उठा रही है।
- उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक असली दोषियों की पहचान नहीं हो पाई है और उन्हें कठोर सजा नहीं दिलाई जा सकी।
मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना न केवल राजनीतिक विवाद बन गया है, बल्कि इसे राष्ट्रीय प्रतीक और सम्मान का उल्लंघन भी माना जा रहा है। विपक्ष इसे देशवासियों के प्रति सरकार की राजनीतिक हताशा और संवेदनशीलता की कमी के रूप में देख रहा है।
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