
विजय की चमक में फीके पड़े पलानीस्वामी, AIADMK में बढ़ी बगावत की आहट…
Tamil Nadu: All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam यानी AIADMK तमिलनाडु की राजनीति में अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। कभी राज्य की सबसे मजबूत राजनीतिक ताकत मानी जाने वाली यह पार्टी अब लगातार चुनावी हार और आंतरिक कलह से जूझ रही है।
नई विधानसभा के पहले सत्र में जब 47 विधायकों वाली AIADMK टीम अलग-अलग गुटों में पहुंची, तो पार्टी के भीतर बढ़ती फूट खुलकर सामने आ गई। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि लगातार चौथी हार के बाद पार्टी महासचिव Edappadi K. Palaniswami यानी EPS के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं।
पलानीस्वामी के नेतृत्व पर उठे सवाल
पार्टी के अंदर एक बड़ा वर्ग मानता है कि लगातार चुनावी असफलताओं की जिम्मेदारी EPS पर है। नेताओं का कहना है कि जनता के बीच पार्टी की पकड़ कमजोर हुई है और नेतृत्व नए राजनीतिक माहौल के मुताबिक खुद को ढालने में असफल रहा है।
सूत्रों के मुताबिक कई वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि पलानीस्वामी या तो पार्टी महासचिव का पद छोड़ें या विधायक दल के नेता के रूप में किसी नए चेहरे को आगे आने दें।
विजय की एंट्री से बदला राजनीतिक समीकरण
तमिल सुपरस्टार Vijay की राजनीति में सक्रियता ने भी राज्य की राजनीति में नया समीकरण बना दिया है। विजय की लोकप्रियता खासकर युवाओं के बीच तेजी से बढ़ी है, जिससे AIADMK का पारंपरिक वोट बैंक प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की बढ़ती राजनीतिक मौजूदगी ने विपक्षी राजनीति का फोकस बदल दिया है। इसका सीधा असर AIADMK की राजनीतिक जमीन पर पड़ता दिखाई दे रहा है।
बगावत की तैयारी में विधायक?
पार्टी के भीतर असंतोष इतना बढ़ चुका है कि अब खुली बगावत की चर्चा होने लगी है। खबरें हैं कि S. P. Velumani और C. V. Shanmugam के नेतृत्व में करीब 32 विधायक अलग रणनीति पर विचार कर रहे हैं।
अगर यह समूह खुलकर सामने आता है तो AIADMK में बड़ा विभाजन हो सकता है। राजनीतिक जानकार इसे “ब्रांड AIADMK” पर नियंत्रण की लड़ाई बता रहे हैं।
यह भी पढ़ें…
Tamil Nadu में ‘विजय’ सरकार का रास्ता साफ, लेफ्ट और VCK ने दिया समर्थन…
जयललिता के बाद लगातार कमजोर हुई पार्टी
पूर्व मुख्यमंत्री J. Jayalalithaa के निधन के बाद से AIADMK लगातार नेतृत्व संकट से जूझ रही है। पार्टी कई गुटों में बंटी और धीरे-धीरे उसकी राजनीतिक ताकत कमजोर होती गई।
हालांकि EPS ने खुद को पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाने की कोशिश की, लेकिन हालिया चुनावी नतीजों ने उनके नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह भी पढ़ें…
Tamil Nadu में सत्ता का सस्पेंस, 108 सीटें जीतकर भी बहुमत से दूर थलपति विजय…
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव
तमिलनाडु की राजनीति में अब द्रमुक और भाजपा के साथ-साथ नए चेहरों की भी सक्रियता बढ़ रही है। ऐसे में AIADMK के सामने अपनी पहचान बचाए रखने की चुनौती और कठिन हो गई है।
अगर पार्टी जल्द आंतरिक संकट का समाधान नहीं निकाल पाती, तो आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में उसकी भूमिका और कमजोर हो सकती है।
यह भी पढ़ें…





