सुशील मोदी के भाषण- ‘आरक्षण के खिलाफ थे नेहरू’, पर भड़के कांग्रेस सांसद

sushil kumar modi

नई दिल्ली। राज्यसभा में ओबीसी आरक्षण की सूची तय करने के लिए राज्यों को अधिकार देने वाले संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान बुधवार को हंगामा मच गया।

विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद और बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी के भाषण पर कांग्रेस सांसद भड़क गए।

सुशील कुमार मोदी ने अपने भाषण में कहा कि बीजेपी लंबे समय से सामाजिक न्याय के लिए तत्पर रही है। उन्होंने कहा कि मैं संघ के बैकग्राउंड से आता हूं और आरएसएस ने हमेशा ही सामाजिक न्याय को लेकर अपनी प्रतिबद्धता जताई है।

इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के एक भाषण का भी जिक्र किया। वहीं देश के पहले पीएम पंडित जवाहर लाल नेहरू का भी उन्होंने जिक्र किया, जिस पर हंगामा शुरू हो गया।

उन्होंने कहा कि पंडित जवाहर लाल नेहरू तो नौकरियों में आरक्षण के ही खिलाफ थे। नेहरू की ओर से मुख्यमंत्रियों को लिखे गए खत का जिक्र करते हुए सुशील मोदी ने यह बात कही।

सुशील मोदी ने नेहरू के लेटर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी तरह के रिजर्वेशन का विरोध किया था।

नेहरू ने लिखा था, ‘मैं किसी भी तरह के आरक्षण का विरोध करता हूं। खासतौर पर नौकरियों में। मैं ऐसी किसी भी चीज का कड़ाई से विरोध करता हूं, जो अक्षमता पैदा करे और दूसरे दर्जे के स्टैंडर्ड्स को लाए।’

नेहरू ने कहा था, ‘मैं भारत को हर मामले में फर्स्ट क्लास देश के तौर पर देखना चाहता हूं। जिस वक्त हम सेकेंड क्लास को प्रोत्साहित करेंगे, उसी वक्त हम हार जाएंगे।’

पंडित नेहरू ने कहा था कि पिछड़े समूहों को मदद करने का एकमात्र तरीका यही है कि उन्हें शिक्षा के अच्छे अवसर दिए जाएं।

लेकिन यदि हम संप्रदाय और जाति के आधार पर आरक्षण की ओर बढ़ते हैं तो फिर हम काबिल लोगों को खो देंगे और सेकेंड रेट और थर्ड रेट को आगे बढ़ा देंगे।’

नेहरू के इस पत्र को सुशील कुमार मोदी की ओर से बढ़े जाने पर हंगामा शुरू हो गया और उसके बाद कई सांसदों ने अपने भाषण में कहा कि बीजेपी की ओर से हर गलती के लिए नेहरू को ही क्यों जिम्मेदार ठहराया जाता रहा है।

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