
‘अबकी बार मोदी सरकार’ और ‘ठंडा मतलब कोका‑कोला’ जैसे स्लोगनों के जनक पीयूष पांडे का निधन
Piyush Pandey Death: देश के विज्ञापन-उद्योग में एक युग का समापन हो गया है। विज्ञापन की दुनिया में ‘आदमी जिसने भारत की जुबान में विज्ञापन लिखे’ के रूप में जाने जाने वाले पीयूष पांडे का 24 अक्टूबर 2025 को निधन हो गया। 70 साल की उम्र में मुंबई में उन्होंने अंतिम सांस ली। पीयूष ने ‘अबकी बार मोदी सरकार’ नारा लिखा था। इसके अलावा, ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा’ गाना लिखा था।

पीयूष पांडे की मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वे गंभीर संक्रमण से जूझ रहे थे। अंतिम संस्कार आज मुंबई में किया जाएगा।
जीवन-परिचय और करियर
- पांडे ने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1982 में ओगिल्वी इंडिया (Ogilvy India) से की थी।
- उन्होंने विज्ञापन-उद्योग में ऐसी शैली लाई जिसने अंग्रेजी-भाषी शहरी विज्ञापनों से हटकर भारतीय भाषा, संस्कृति और भावनाओं के साथ जुड़ी हुई थी।
- उनके बनाए गए कुछ प्रमुख अभियान निम्नलिखित हैं:
* Fevicol: विज्ञापन जिसमें ‘टूटेगा नहीं’-भाव था।
* Cadbury: “कुछ खास है” स्लोगन-वाले विज्ञापन।
* Asian Paints: “हर घर कुछ कहता है” जैसे अभियान।
* राजनीतिक-स्लोगन: “अब की बार मोदी सरकार” भी उनके क्रिएशन में था।
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निधन और प्रतिक्रिया
उनके निधन के खबर से विज्ञापन-मीडिया जगत में शोक की लहर है। कई वरिष्ठ नेता तथा उद्योग-पेशेवरों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
Truly at a loss for words to express my sadness at the demise of Padma Shri Piyush Pandey.
A phenomenon in the world of advertising, his creative genius redefined storytelling, giving us unforgettable and timeless narratives.
To me, he was a friend whose brilliance shone… pic.twitter.com/t6ZDSViCrS
— Piyush Goyal (@PiyushGoyal) October 24, 2025
केंद्रीय मंत्री पियुष गोयल ने उन्हें “विज्ञापन की दुनिया में एक घटना” के रूप में संबोधित किया।
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विरासत
पीयूष पांडे ने सिर्फ विज्ञापन दिए नहीं — उन्होंने भारतीय विज्ञापन-संवाद की भाषा बदल दी। उनकी सोच में उत्पाद-विक्रय के पीछे संवाद, साथ भावना, संस्कृति-सहजता थी।
उनकी शैली ने आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मापदंड तय किया है कि विज्ञापन सिर्फ दिखने-वाले संदेश नहीं होते, बल्कि वे सामाजिक-सार्थक एवं सांस्कृतिक जड़ वाले हों।
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