यूपी में प्रदूषण का ‘अटैक’; फेफड़े बीमार, त्वचा कैंसर के साथ मेमोरी लॉस का भी खतरा

UP Pollution: कड़ाके की ठंड के साथ कई जिलों में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगा है. दिल्ली से सटे यूपी के जिलों में एक्यूआई (Air Quality Index) 400 के पार तक पहुंच जा रहा.

ग्रेटर नोएडा, नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ और हापुड़ समेत कई शहरों में प्रदूषण का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है.

विशेषज्ञों और अलग अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदूषण का असर सेहत पर तो पड़ता ही है साथ ही साथ यह मानसिक रूप से लोगों को परेशान करता है. बहुत से मरीजों को त्वचा संबंधित दिक्कतें होने लगती हैं.

सांस लेने में परेशानी: केजीएमयू के पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि प्रदूषित वायु केवल फेफड़ों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि शरीर के विभिन्न अंगों को प्रभावित करती है. सांस से संबंधित मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होने लगती है.

इस स्थिति में ऐसे मरीजों को यही कहा जाता है कि बाहर निकलने से पहले मुंह पर मास्क जरूर लगाएं. अनावश्यक बाहर न निकलें. जिस समय धुंध होती है, उस समय मॉर्निंग या इवनिंग वॉक न करें.

त्वचा कैंसर : केजीएमयू की त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. पारुल वर्मा ने कहा कि वायु में मौजूद विषैली गैसें और सूक्ष्म कण त्वचा की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करते हैं. इससे समय से पहले ही झुर्रियां, पिग्मेंटेशन और अन्य त्वचा संबंधी समस्याएं आने लगती हैं. लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से त्वचा कैंसर का भी जोखिम बढ़ सकता है.

केजीएमयू के न्यूरोलाजिस्ट डॉ. हरीश निगम ने बताया कि पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण रक्त-मस्तिष्क बाधा (ब्लड ब्रेन बैरियर) को पार कर मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाते हैं. इलसे न्यूरोलाजिकल क्षति और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है.

मेमोरी लॉस की समस्या : मनोचिकित्सक डॉ. अमित आर्य ने कहा कि लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने से मस्तिष्क की संज्ञानात्मक क्षमता प्रभावित होती है. इससे मेमोरी लॉस और सोचने-समझने की क्षमता में गिरावट देखी जाती है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि इनडोर वायु प्रदूषण एक अदृश्य लेकिन गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है.

उन्होंने बताया कि घरों, कार्यस्थलों और अस्पतालों के भीतर मौजूद प्रदूषण को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि इसका स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक और गहरा प्रभाव पड़ता है.

एक्यूआई गुणवत्ता के मायने : 0-50 तक के AQI को अच्छा माना जाता है. इसी तरह 51-100 AQI संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बेहद खराब, 401-500 तक का AQI खतरनाक माना जाता है.

AQI की स्थिति : सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) की शुक्रवार की दोपहर 2 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक नोएडा का एक्यूआई 438, मेरठ का एक्यूआई 369, गाजियाबाद का एक्यूआई 416, ग्रेटर नोएडा का एक्यूआई 335, हापुड़ का एक्यूआई 403, गोरखपुर का एक्यूआई 286, प्रयागराज का एक्यूआई 193, लखनऊ का एक्यूआई 290 रहा.

इसी कड़ी में मुरादाबाद का एक्यूआई 144, वृंदावन का एक्यूआई 91, कानपुर का एक्यूआई 136, बरेली का एक्यूआई 102, झांसी का एक्यूआई 121, प्रतापगढ़ का एक्यूआई 315 और वाराणसी का एक्यूआई 184 हैं.

क्षेत्र की ये है हालत : सीपीसीबी रिपोर्ट के मुताबिक ताल कटोरा इंडस्ट्रियल एरिया का एक्यूआई 384, केंद्रीय विद्यालय लखनऊ का एक्यूआई 275, लालबाग का एक्यूआई 280, गोमतीनगर का एक्यूआई 220, अंबेडकर नगर विवि का एक्यूआई 152 और कुकरैल पिकनिक स्पॉट का एक्यूआई 131 हैं. यह प्रदूषण स्तर शुक्रवार दोपहर 2 बजे की रिपोर्ट के मुताबिक है. बीते दिनों सुबह, शाम और रात के समय इंडस्ट्रियल क्षेत्र का एक्यूआई 400 अंक के पार पहुंच गया था.

सुबह, शाम और रात में न निकलें बाहर : उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. उमेश चंद्र शुक्ला ने बताया कि इस समय प्रदूषण बहुत अधिक बढ़ रहा है. ऐसे मौसम में लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है. वर्तमान में जो प्रदूषण स्तर बढ़ रहे हैं, वह सर्दी बढ़ने के कारण हो रहा है. इंडस्ट्रियल एरिया का हाल बहुत खराब रहता है. सुबह, शाम और रात के समय प्रदूषण स्तर 350 के पार पहुंच जाता है.

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