मासूमों की मौत पर सवाल… गाजियाबाद सुसाइड केस में जांच की आंच तेज

Ghaziabad Suicide Case: गाजियाबाद में तीन नाबालिग लड़कियों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे मृतकाओं के पिता की भूमिका पर सवाल गहराते जा रहे हैं। पुलिस की जांच का दायरा अब परिवार के अंदर के माहौल, बच्चों की मानसिक स्थिति और घटना से पहले की परिस्थितियों पर केंद्रित हो गया है।

पिता का दावा: “घर में था बच्चों के अनुकूल माहौल”
मृतक लड़कियों के पिता ने पुलिस पूछताछ में दावा किया है कि उनके घर में बच्चों के लिए पूरी तरह अनुकूल माहौल था। उन्होंने कहा कि बेटियों को किसी भी तरह की सख्ती या दबाव नहीं दिया जाता था और उन्हें पूरी छूट मिली हुई थी। पिता के मुताबिक, हाल के दिनों में बेटियां अत्यधिक मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रही थीं, जिससे उनकी आंखों में सूजन आ गई थी। इसी कारण उन्होंने बेटियों से मोबाइल फोन कुछ समय के लिए ले लिया था।

पिता का कहना है कि फोन छीने जाने से नाराज होकर ही तीनों बेटियों ने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। उनका दावा है कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था जिससे बच्चों को मानसिक आघात पहुंचे।

पुलिस को बयान पर नहीं हो रहा पूरा भरोसा
हालांकि, पुलिस पिता के बयान को अंतिम सच मानने को तैयार नहीं है। जांच अधिकारियों का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है और केवल फोन छीने जाने जैसी वजह से तीनों का एक साथ आत्महत्या कर लेना कई सवाल खड़े करता है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या बच्चों पर किसी तरह का मानसिक दबाव, डर या पारिवारिक तनाव था, जो इस कदम की वजह बना।

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मोबाइल और डिजिटल डेटा की जांच
पुलिस ने मृतक लड़कियों के मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट्स और चैट हिस्ट्री की जांच शुरू कर दी है। यह देखा जा रहा है कि कहीं वे किसी ऑनलाइन दबाव, साइबर बुलिंग या किसी बाहरी प्रभाव में तो नहीं थीं। साथ ही स्कूल, दोस्तों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि बेटियों की मानसिक स्थिति को समझा जा सके।

पिता पर बढ़ रही जांच की आंच
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, पिता की भूमिका जांच के घेरे में आती जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या बेटियों के साथ पहले कभी मारपीट, सख्ती या मानसिक उत्पीड़न की शिकायत रही है। पड़ोसियों और जानकारों से पूछताछ में मिले इनपुट्स को भी केस डायरी में दर्ज किया जा रहा है।

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पुलिस का कहना
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के नतीजे इस केस में अहम भूमिका निभाएंगे। फिलहाल किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर निष्पक्ष जांच की जा रही है।

यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि बच्चों की मानसिक सेहत, डिजिटल आदतों और पारिवारिक संवाद पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस दर्दनाक घटना के पीछे असली वजह क्या थी।

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