पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में HIV मामलों में तेज़ बढ़ोतरी, WHO ने जताई गंभीर चिंता

HIV Cases: पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस) के बढ़ते मामलों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की चिंता बढ़ा दी है। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यह केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन रहा है।

फिजी में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में पश्चिमी प्रशांत के 38 देशों के स्वास्थ्य मंत्री और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक का उद्देश्य संक्रमण की तेज गति को रोकने और उपचार की पहुँच बढ़ाने के लिए मजबूत रणनीति तैयार करना था।

सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र
डब्ल्यूएचओ(WHO) के अनुसार फिजी में पिछले 10 वर्षों में एचआईवी मामलों में 10 गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं फिलीपींस में 2010 से 2024 के बीच नए मामलों में 6 गुना वृद्धि देखी गई है, विशेषकर समलैंगिक और उभयलिंगी पुरुषों में संक्रमण दर बढ़ी है। यही नहीं पापुआ न्यू गिनी ने महिलाओं और बच्चों में लगातार बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राष्ट्रीय संकट घोषित किया है।

विशेषज्ञों के मुताबिक इंजेक्टेबल ड्रग्स का उपयोग मामले बढ़ने का प्रमुख कारण बन रहा है, और यदि हालात जल्द नहीं सुधरे तो संक्रमण अन्य द्वीपों में तेजी से फैल सकता है।

टेस्ट और इलाज की कमी बड़ी वजह
डब्ल्यूएचओ(WHO) ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि—

  • पर्याप्त टेस्टिंग नहीं हो पा रही
  • इलाज और दवाओं तक समय पर पहुँच नहीं
  • हाशिए पर रहने वाले समुदायों तक सेवाएँ नहीं पहुँच पा रहीं

डब्ल्यूएचओ(WHO) के क्षेत्रीय निदेशक सिया माउ पियुकाला ने कहा कि एचआईवी(HIV) खत्म नहीं हुआ है। अब विशेष रणनीति अपनाकर तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है। हर एक पल बेहद कीमती है।”

यूएनएड्स(UNAIDS) के क्षेत्रीय निदेशक इमोन मर्फी ने भी एचआईवी(HIV) रोकथाम में निवेश बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।

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किन देशों ने दिखाई दृढ़ता?
बैठक में ऑस्ट्रेलिया, कंबोडिया, मलेशिया, न्यूजीलैंड और वियतनाम की कार्यनीति की सराहना की गई।
इन देशों ने —

  • वैज्ञानिक तरीकों पर आधारित रोकथाम
  • एंटीरेट्रोवायरल उपचार की सार्वभौमिक उपलब्धता
  • समय पर नीतिगत हस्तक्षेप
  • के जरिए बेहतर परिणाम हासिल किए हैं।

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भविष्य की नीति: ये कदम होंगे प्राथमिकता में
बैठक के अंत में सभी सदस्य देशों ने एचआईवी को राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंडा में उच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लिया। साथ ही—

  • इंजेक्टेबल ड्रग यूज़र्स के लिए हानि-न्यूनन (harm reduction) कार्यक्रम
  • व्यापक टेस्टिंग
  • सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के जरिए फंडिंग
  • भेदभाव खत्म करने के उपाय

उपर्युक्त बिंदुओं पर जोर दिया गया।

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