
RBI की मौद्रिक नीति बैठक शुरू… मुद्रास्फीति नरम रहने का अनुमान
RBI MPC Meeting: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक सोमवार से शुरू हो गई है। इस बैठक में रेपो रेट और अन्य वित्तीय नीतियों पर फैसले लिए जाएंगे। मौजूदा समय में रेपो रेट 5.50 प्रतिशत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी टैरिफ और कम मुद्रास्फीति दर को देखते हुए आरबीआई संभवतः रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। इस साल की शुरुआत से अब तक आरबीआई ने रेपो रेट में कुल 1 प्रतिशत की कटौती की है, जिसमें:
- फरवरी में 0.25 प्रतिशत,
- अप्रैल में 0.25 प्रतिशत, और
- जून में 0.50 प्रतिशत की कटौती शामिल है।
मौजूदा आर्थिक स्थिति और प्रभाव
विशेषज्ञों के अनुसार केंद्रीय बैंक द्वारा रेपो दर पर यथास्थिति बनाए रखने की उम्मीद इसलिए है क्योंकि:
- जीएसटी सुधारों की मांग ने आर्थिक गतिविधियों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।
- वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में अपेक्षा से अधिक GDP वृद्धि हुई है।
- मुद्रास्फीति की दर में वृद्धि होने की संभावना बनी हुई है, जिसके चलते आगे दर बढ़ने की संभावना भी है।
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एसबीआई रिपोर्ट का विश्लेषण
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के पटरी पर लौटने और जीएसटी युक्तिकरण के बीच मुद्रास्फीति 2004 के बाद निचले स्तर की ओर बढ़ रही है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि वर्तमान स्थिति में ब्याज दरों में कटौती आरबीआई के लिए सबसे अच्छा विकल्प होगी।
- जून और अगस्त की बैठक की समीक्षा
- जून में आरबीआई ने 0.50 प्रतिशत की कटौती की थी।
- अगस्त में नीतिगत दर को 5.50 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया।
एसबीआई के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. सौम्य कांति घोष के अनुसार, CPI मुद्रास्फीति अभी अपने निचले स्तर पर नहीं है और जीएसटी युक्तिकरण से इसमें 65-75 आधार अंकों की और गिरावट आ सकती है।
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वित्त वर्ष 2027 की संभावनाएँ
- डॉ. घोष के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में भी मुद्रास्फीति नरम बनी रहेगी।
- सितंबर और अक्टूबर में CPI मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से नीचे रही, भले ही जीएसटी में कोई कटौती न हुई हो।
- वित्त वर्ष 2027 के CPI आंकड़े अब 4 प्रतिशत या उससे कम पर रहने की उम्मीद है।
- जीएसटी युक्तिकरण के साथ अक्टूबर का CPI लगभग 1.1 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जो 2004 के बाद सबसे निचला स्तर होगा।
आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक में नीतिगत फैसले इस बात पर आधारित होंगे कि मुद्रास्फीति नरम बनी रहे और आर्थिक विकास स्थिर रहे। वर्तमान आर्थिक संकेतकों और जीएसटी सुधारों को देखते हुए, रेपो रेट को यथावत रखने की संभावना अधिक है।
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