
Delhi Blast से जुड़ा सहारनपुर का कनेक्शन, 32 संदिग्ध वाहनों ने बढ़ाई एजेंसियों की चिंता
Red Fort Blast Updates: दिल्ली के लाल किले के पास चलती कार में हुए धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। घटना के बाद दिल्ली पुलिस, यूपी एटीएस और अन्य केंद्रीय खुफिया एजेंसियां मिलकर जांच में जुटी हैं। अब इस केस में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है—जांच में ट्रेस की गई ज्यादातर संदिग्ध गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुआ था। इस खुलासे के बाद जांच का फोकस तेजी से पश्चिमी यूपी की ओर शिफ्ट हो गया है।
32 संदिग्ध गाड़ियां पकड़ी गईं, ज्यादातर सहारनपुर नंबर
सूत्रों के अनुसार, अब तक जांच एजेंसियों ने 32 संदिग्ध वाहनों को पकड़ा है। ये वाहन किसी न किसी रूप में संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े पाए गए। इनमें से अधिकांश गाड़ियां सहारनपुर एआरटीओ में पंजीकृत थीं।
इसी कारण यूपी एटीएस की एक विशेष टीम सहारनपुर पहुंची है और एआरटीओ कार्यालय से सभी वाहनों का पूरा रिकॉर्ड खंगाल रही है—
- वाहनों के असली मालिक कौन हैं
- गाड़ियां किन इलाकों में चलाई गईं
- कोई पुराना नोटिस या संदिग्ध गतिविधि तो नहीं
- किसी वाहन का मालिक बार-बार बदल तो नहीं रहा
जांच का दायरा यूपी, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर तक विस्तारित
दिल्ली धमाके के बाद एजेंसियों को पहले ही शक था कि यह नेटवर्क केवल दिल्ली में सीमित नहीं है। अब वाहन ट्रेसिंग, मोबाइल लोकेशन और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच के बाद यह आशंका और मजबूत हो गई है।
जांच अब तीन राज्यों तक विस्तारित हो चुकी है—
- उत्तर प्रदेश (विशेषकर सहारनपुर)
- हरियाणा
- जम्मू-कश्मीर
एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन गाड़ियों का इस्तेमाल केवल ट्रांसपोर्ट के लिए हुआ या फिर
- रेक्की
- संदेश पहुंचाने
- नेटवर्क एक्टिव रखने
- या किसी बड़ी साजिश की तैयारी
के लिए भी किया गया।
अंबाला रोड के डॉक्टर की गिरफ्तारी से मिले बड़े सुराग
कुछ दिन पहले एटीएस और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अंबाला रोड स्थित अस्पताल के डॉक्टर अदील अहमद को गिरफ्तार किया था। अदील पर सफेदपोश आतंकी नेटवर्क संचालित करने का आरोप है।
अदील से पूछताछ में जो सुराग मिले, उनसे पश्चिमी यूपी और खासकर सहारनपुर की भूमिका और स्पष्ट होती जा रही है। कई संदिग्ध गाड़ियों के लोकेशन डेटा भी उसके नेटवर्क से मेल खाते पाए गए हैं।
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वाहनों के मालिकों को भेजे गए नोटिस
जांच टीमों ने कई वाहन मालिकों को पूछताछ के लिए नोटिस भेजे हैं। कुछ गाड़ियों के खरीदारों की लोकेशन धमाके के दिन संदिग्ध जगहों पर पाई गई, जिससे शक और गहरा गया है।
क्या बड़े मॉड्यूल का हिस्सा थीं ये गाड़ियाँ?
एजेंसियों का प्राथमिक अनुमान है कि यह नेटवर्क काफी संगठित और बहु-राज्यीय हो सकता है। कई सुराग इस ओर इशारा करते हैं कि ये गाड़ियाँ किसी बड़े मॉड्यूल का हिस्सा रही हों।
जांच एजेंसियां इस बात पर भी ध्यान दे रही हैं कि—
- क्या गाड़ियों में बदल-बदलकर लोग बैठे?
- क्या इनका इस्तेमाल विस्फोटकों की आवाजाही के लिए हुआ?
- क्या कोई मास्टरमाइंड पश्चिमी यूपी में छिपा है?
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आने वाले दिनों में हो सकते हैं बड़े खुलासे
अभी यह जांच शुरुआती चरण में है, लेकिन जो सुराग सामने आ रहे हैं, उनसे एजेंसियों को एक बड़े नेटवर्क के सक्रिय होने का अंदेशा है। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे डिजिटल और फिजिकल सबूतों की जांच आगे बढ़ रही है, कई महत्वपूर्ण कड़ियाँ आपस में जुड़ती जा रही हैं।
दिल्ली के लाल किले के पास हुआ यह धमाका संभवतः किसी बड़े आतंकी प्लान का संकेत हो सकता है, जिसका खुलासा आने वाले दिनों में हो सकता है।
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