बीमारियों को दावत है बार-बार गर्म किया भोजन, आयुष मंत्रालय ने दी चेतावनी

Health: भारत में खाने की आदतें बदल रही हैं, लेकिन कई लोग अभी भी बचे हुए भोजन को बार-बार गर्म करके खाने से परहेज़ नहीं करते। आयुष मंत्रालय और आयुर्वेद विशेषज्ञों ने चेताया है कि यह आदत स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। बार-बार गर्म किए गए भोजन को आयुर्वेद में ‘अहितकर भोजन’ कहा गया है।

ऐसे भोजन का सेवन शरीर के तीनों दोष—वात, पित्त और कफ—को असंतुलित कर सकता है, जिससे कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

ताजा भोजन क्यों है जरूरी?
आयुर्वेद में ताजा पका हुआ भोजन ही स्वास्थ्य और ऊर्जा का स्रोत माना गया है। इसके विपरीत, एक बार पकाया हुआ भोजन बार-बार गर्म करने से इसे ‘अहितकर भोजन’ कहा जाता है। यह शरीर के तीन दोष—वात, पित्त और कफ—को असंतुलित कर देता है।

  • वात दोष: बेचैनी, अनिद्रा, जोड़ों में दर्द, मानसिक अस्थिरता।
  • पित्त दोष: एसिडिटी, मुंह में जलन, त्वचा की समस्या, गुस्सा।
  • कफ दोष: आलस्य, भारीपन, मोटापा, सांस लेने में कठिनाई।

पोषक तत्वों का नुकसान और हानिकारक यौगिक
आयुर्वेद के अनुसार, भोजन पकते ही उसका सेवन करना चाहिए। बार-बार गर्म करने से उसमें मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और कुछ मामलों में हानिकारक यौगिक भी बनने लगते हैं। ये यौगिक कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं। लगातार ऐसा भोजन लेने से छोटी-छोटी मौसमी बीमारियों के अलावा गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

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आयुष मंत्रालय की सलाह
आयुष मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे ताजा पका भोजन ही अपनी थाली में शामिल करें। विशेषज्ञों के अनुसार, ताजा और सात्विक भोजन न केवल शरीर को पोषण देता है बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और इम्यूनिटी को भी मजबूत बनाता है। भोजन पकते ही उसका सेवन करना सबसे सुरक्षित और लाभकारी विकल्प है।

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विशेषज्ञों की चेतावनी
ताजा भोजन का सेवन स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। बार-बार गर्म किए गए भोजन से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आयुष मंत्रालय और आयुर्वेदिक विशेषज्ञों की चेतावनी के मुताबिक, अपने भोजन को ताजगी के साथ खाना और बार-बार गर्म किए गए खाने से परहेज करना हर व्यक्ति की सेहत और दीर्घायु के लिए जरूरी है।

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