
Iran के हमलों से घबराया सऊदी अरब… शाही परिवार अलर्ट, रियाद ने बढ़ाई सुरक्षा
Iran-Israel War: मध्य पूर्व में इस समय हालात बेहद तनावपूर्ण हैं। सऊदी अरब और ईरान के बीच टकराव तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार सऊदी अरब के शाही परिवार और शीर्ष नेतृत्व को आशंका है कि ईरान सीधे या अपने सहयोगी संगठनों के जरिए सऊदी नेताओं और महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमला कर सकता है। इसी खतरे के कारण सऊदी सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और शीर्ष स्तर की कई बैठकों को गुप्त रूप से ऑनलाइन आयोजित किया जा रहा है।
ईरानी हमलों से बढ़ी सऊदी नेतृत्व की चिंता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल के दिनों में ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों की गतिविधि बढ़ी है। इन हमलों का लक्ष्य तेल प्रतिष्ठान, सैन्य अड्डे और रणनीतिक ठिकाने बताए जा रहे हैं। 2 मार्च 2026 को सऊदी अरब के रास तनूरा स्थित दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे वहां आग लग गई और संचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा।
इस हमले के बाद सऊदी सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी कि ऐसे हमले देश की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि रियाद ने अपनी रक्षा प्रणाली और खुफिया निगरानी को और मजबूत कर दिया है।
अमेरिकी दूतावास पर भी ड्रोन हमला
तनाव तब और बढ़ गया जब राजधानी रियाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर भी ड्रोन हमला हुआ। दो ड्रोन इमारत से टकराए जिससे हल्का नुकसान हुआ, हालांकि कोई हताहत नहीं हुआ। सऊदी एयर डिफेंस ने कई अन्य ड्रोन भी मार गिराए।
यह हमला उस समय हुआ जब ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। विश्लेषकों के अनुसार इन हमलों का उद्देश्य अमेरिका के क्षेत्रीय सहयोगियों पर दबाव बनाना भी हो सकता है।
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शाही परिवार और प्रिंस सलमान की सुरक्षा बढ़ाई गई
सूत्रों के अनुसार सऊदी नेतृत्व को डर है कि ईरान या यमन में सक्रिय Houthi movement के लड़ाके देश के शीर्ष नेताओं को निशाना बना सकते हैं। इसलिए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman समेत शाही परिवार की सुरक्षा कई स्तरों पर बढ़ा दी गई है।
- वरिष्ठ नेताओं की आवाजाही सीमित कर दी गई है
- संवेदनशील बैठकों को ऑनलाइन या सुरक्षित स्थानों पर किया जा रहा है
- सैन्य और खुफिया एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है
रिपोर्टों में कहा गया है कि सऊदी नेतृत्व को आशंका है कि अगर नागरिक ठिकानों या ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले जारी रहे तो रियाद सीधे सैन्य कार्रवाई पर भी विचार कर सकता है।
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पूरे मध्य पूर्व में फैल सकता है युद्ध
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब पूरे मध्य पूर्व में फैल सकता है। इस संकट के कारण खाड़ी देशों, तेल आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ रहा है। अगर सऊदी अरब सीधे युद्ध में शामिल होता है तो यह संघर्ष केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व में बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
ईरान और सऊदी अरब के बीच बढ़ता तनाव मध्य पूर्व की राजनीति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा दोनों के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। सऊदी शाही परिवार की सुरक्षा चिंताएं, ड्रोन-मिसाइल हमले और अमेरिका-इजरायल की भूमिका इस संकट को और जटिल बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह टकराव क्षेत्रीय युद्ध का रूप भी ले सकता है।
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