
शर्मनाक! पाकिस्तान में पोलियो टीम पर बंदूकधारियों की फायरिंग, पुलिसकर्मी की मौत
Pakistan News: उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में पोलियो टीकाकरण अभियान को एक बार फिर निशाना बनाया गया। उत्तरी वजीरिस्तान जिले की मीर अली तहसील में अज्ञात बंदूकधारियों ने पोलियो टीम पर गोलीबारी की, जिसमें टीम की सुरक्षा में तैनात एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार को इस घटना की पुष्टि की। यह क्षेत्र अफगानिस्तान की सीमा से सटा हुआ है और लंबे समय से हिंसा और अस्थिरता का केंद्र रहा है।
पुलिस के अनुसार, हमलावरों ने अचानक गोलीबारी शुरू की और मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही पुलिस दल घटनास्थल पर पहुंचे और पूरे इलाके को घेर कर हमलावरों की तलाश के लिए व्यापक अभियान शुरू किया। हालांकि अभी तक किसी ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हमले अक्सर स्थानीय आतंकवादी समूहों से जुड़े होते हैं।
पोलियो टीमों पर हमले की पैटर्न
पाकिस्तान में पोलियो उन्मूलन अभियान कई वर्षों से चुनौतियों का सामना कर रहा है। खासकर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के हिस्सों—जैसे उत्तरी वजीरिस्तान, दक्षिणी वजीरिस्तान, बन्नू और बजौर—में बार-बार पोलियो टीमें निशाने पर रही हैं। पिछले एक दशक में सैकड़ों पोलियो कर्मियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है।
हमलों के पीछे कारण
2012 से अब तक 200 से अधिक पोलियो से जुड़े लोग मारे गए हैं। इन हमलों के पीछे मुख्य कारण हैं:
- धार्मिक कट्टरता और अफवाहें
- पोलियो वैक्सीन को पश्चिमी साजिश बताने वाले समूह
- नसबंदी का माध्यम होने की झूठी अफवाहें
विशेष रूप से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने वैक्सीन कार्यक्रम को निशाना बनाया है। इन अफवाहों ने कई समुदायों को वैक्सीनेशन से इंकार करने के लिए उकसाया, जिससे पाकिस्तान दुनिया के उन कुछ देशों में शामिल है जहाँ वाइल्ड पोलियो वायरस अभी भी सक्रिय है।
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सुरक्षा उपाय और सरकार की प्रतिक्रिया
हाल के वर्षों में पोलियो हमलों में वृद्धि देखी गई है, खासकर सीमावर्ती इलाकों में। इसके बावजूद पाकिस्तानी सरकार और स्वास्थ्य विभाग पोलियो अभियान जारी रखे हुए हैं। सुरक्षा के लिए पुलिस और लेवी फोर्स तैनात की जाती है। हर अभियान में हजारों महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता घर-घर जाकर बच्चों को वैक्सीन पिलाती हैं। सरकार ने वैक्सीनेशन को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया है और WHO, UNICEF और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर काम कर रही है।
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पोलियो कर्मियों का जोखिम
पाकिस्तान और अफगानिस्तान ही ऐसे दो देश हैं जहाँ पोलियो वायरस अभी भी सक्रिय है। हमले न केवल जान जोखिम में डालते हैं, बल्कि अभियान को बाधित कर वायरस फैलने का खतरा बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी और समुदाय स्तर पर जागरूकता नहीं फैलेगी, पूर्ण उन्मूलन मुश्किल है।
मीर अली हमले ने एक बार फिर यह साबित किया कि पोलियो कर्मी कितने जोखिम भरे माहौल में काम कर रहे हैं।
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