महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा सवाल, NCP (अजित गुट) का भविष्य किसके भरोसे?

Maharashtra News: महाराष्ट्र की राजनीति को बड़ा झटका देते हुए डिप्टी मुख्यमंत्री अजित पवार (66) का बुधवार सुबह विमान हादसे में निधन हो गया। वे मुंबई से बारामती के लिए विशेष विमान से रवाना हुए थे, लेकिन लैंडिंग के दौरान तकनीकी खराबी के चलते दुर्घटना हो गई। उनके अचानक चले जाने से न सिर्फ पवार परिवार, बल्कि राज्य की सियासत में भी अनिश्चितता गहरा गई है। सबसे बड़ा सवाल यही है—अब अजित पवार की एनसीपी (एनसीपी-अजित गुट) की कमान कौन संभालेगा?

अजित पवार: सियासत का लंबा सफर
अजित अनंतराव पवार ने करीब 35 साल की राजनीति में 8 बार विधायक और 6 बार डिप्टी सीएम के रूप में काम किया। वे महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री भी रहे। शरद पवार की राजनीतिक छांव में शुरुआत करने के बाद उन्होंने अपनी अलग राह चुनी और बारामती से लेकर राज्य स्तर तक मजबूत पकड़ बनाई। 2023 में पार्टी विभाजन के बाद एनसीपी का बड़ा धड़ा उनके साथ आया।

NCP की अगली कमान: संभावित चेहरे

1) प्रफुल्ल पटेल
अजित पवार के बाद संगठन में नंबर-दो माने जाते हैं। राष्ट्रीय कद के नेता हैं, लेकिन जमीनी पकड़ को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई वरिष्ठ नेता उन्हें सर्वमान्य नेता के रूप में स्वीकार करेंगे या नहीं—यह बड़ा सवाल है।

2) छगन भुजबल
अपनी अलग राजनीतिक ताकत और जनाधार रखते हैं। हालांकि, सर्वसम्मति बनना उनके लिए भी आसान नहीं दिखता।

3) पार्थ पवार / सुनेत्रा पवार
अजित पवार के सियासी वारिस के तौर पर पार्थ पवार को पहले ही राजनीति में उतारा गया था (2019 लोकसभा चुनाव)। सुनेत्रा पवार हाल में राज्यसभा पहुंची हैं। दोनों के पास अनुभव सीमित है, ऐसे में पार्टी को एकजुट रखना चुनौतीपूर्ण होगा।

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क्या शरद पवार फिर संभालेंगे बागडोर?
अजित पवार के निधन के बाद सबसे मजबूत संभावना शरद पवार के फिर से सक्रिय होने की दिख रही है। जिन नेताओं ने 2023 में अजित पवार का साथ दिया था, उन्हें स्थापित करने में शरद पवार की भूमिका रही है। 2024 के बाद दोनों गुटों में बढ़ती नजदीकियों—संयुक्त चुनावी तालमेल और सार्वजनिक संकेतों—ने एकजुटता की जमीन तैयार की थी। ऐसे में शरद पवार के नेतृत्व में पार्टी को फिर से एकजुट करने की कोशिशें तेज हो सकती हैं।

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भविष्य की रणनीति पर मंथन
एनसीपी के लिए यह समय नेतृत्व, एकता और दिशा—तीनों की परीक्षा का है। वरिष्ठता बनाम विरासत, संगठन बनाम जनाधार—इन सभी समीकरणों के बीच अंतिम फैसला होगा। फिलहाल, पवार परिवार एकजुट दिख रहा है और पार्टी के बड़े नेता भी भविष्य की रणनीति पर मंथन में जुटे हैं।

नज़रें अब इस पर टिकी हैं कि एनसीपी की कमान किसके हाथ जाती है—और महाराष्ट्र की राजनीति किस मोड़ पर आगे बढ़ती है।

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